Unexpectedstories.in लैब में एक बार फिर से वीर और ओम शास्त्र एक दूसरे के साथ रहने के लिए विवश थे| वीर को बहुत से सवालों ने घेर रखा था; लेकिन वह ओम से कुछ नहीं कह सकता था| उसने सोचा की एक छोटी सी गलती भी उसकी बेदखली का कारण बन सकती है| इसीलिए, वह जान-बूझकर अपनी बेचैनी को सेह रहा था|
जब से वीर अंदर आया था, तब से ही ओम उसे ध्यान से देख रहा था|
तुम ठीक तो हो?” ओम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा|
“हाँ! क्यों?” वीर अपने खयालो से बहार निकलता हुआ बोला|
“तुम तनाव में लग रहे हो|” ओम ने कहा|
वीर दुविधा में था की जो बात उसे परेशां कर रही है, उसे कहे या ऐसे ही जाने दे! कुछ पल सोचते हुए वह चुप रहा; किन्तु उसकी उत्सुकता बाकी सब चीज़ों पर भारी थी|
और इसीलिए उसने पूछा, “तुम एक कक्ष में बैठे हो| तुम कैसे जान सकते हो की बारिश होने वाली थी, वह भी मासूम में बदलाव आने से कई घंटे पहले? इसके अलावा, तुमने हवा की गति का हिसाब लगाया, गीली मिटटी की सुगंध को सूंघ लिया और तापमान में गिरावट को भी महसूस कर लिया था| इस कक्ष में बिलकुल हवा नहीं है| यह तुमने कैसे किया?”
वीर अविश्वास से अपना सर हिला रहा था|
ओम शास्त्र हल्का-सा मुस्कुराया|
“वास्तव में, मैं यह भी जानता हूँ की मैं भारत के दक्षिणी तट पर स्तिथ एक द्वीप पर हूँ और मैं यह केवल अपनी इन्द्रियों की सहायता से बता सकता हूँ|”
वीर के होश उड़ चुके थे|
“तुम यह नहीं जान सकते! जब तुम्हे हेलीकाप्टर में लाया जा रहा था, तुम बेहोश थे और तुम्हारी आँखों पर पट्टी बंधी हुई थी|”
“लेकिन मुझे यह सब पता है| इसके लिए बस, कुछ अनुभव और अभ्यास की आवश्यता है| यह तुम भी कर सकते हो, कोई भी कर सकता है|” ओम ने कंधे झटकते हुए वास्तविकता प्रकट की|
“कैसे?” वीर को कुछ समझ नहीं आ रहा था|
जैसे तुम आसानी से अपनी आँखों की मदद से विभिन रंगो में अंतर कर सकते हो, वैसे ही बस, ध्यान केंद्रित करके विभिन्न तरंगो को करो, जैसे तुम आकाश में हवाई जहाज को गायब होते देख सकते हो और एक चील को जैसे-जैसे वह ऊँचा उड़ती जाती है, बिंदु में परिवर्तित होते हुए, वैसे ही तुम चीज़ों को पास आते और जाते भी सूंघ सकते हो|”
वीर द्वारा सीखे गए सभी तर्क और विश्लेषण से परे ओम ने विस्तार के साथ समझाया| वीर को और बहुत कुछ सुलझाना था, इसीलिए उसने अपनी बूढी न लगते हुए अगला परेशां किया-
“तुम एक दक्षिण भारतीय नहीं हो, फिर भी तुम इतनी सहजता से त्रुटि-रहित तेलुगु कैसे बोल लेते हो?”
“मैंने तेलगु में कब बात की?” ओम ने आश्चर्या के साथ पूछा|
“दोनों हैरान होके एक-दूसरे की तरफ देखने लगे| इससे पहले की कोई कुछ बोल पाता, डॉ निवासन ने कक्ष में प्रवेश किया| डॉ बत्रा भी डॉ निवासन के पीछे उसी समय वहां पहुंच गए| वीर ने पहले डॉ निवासन की ओर देखा और फिर डॉ बत्रा की ओर| डॉ बत्रा ने घमंड के साथ ओम शास्त्र को घूरा, फिर डॉ निवासन से धीरे से कहा, हम आपसे बात करना चाहते है|”
“हम्म?” डॉ निवासन ने पूछा|
“हम सभी, सर|”
“अभी नहीं| हम इस सेशन के बाद लंच ब्रेक में बात करेंगे|”
“सर, हम आपसे बात किये बिना दूसरे सेशन शुरू नहीं करेंगे|” डॉ बत्रा ने जोर देते हुए कहा|
“टीम के बाकी लोग कहा है?” डॉ निवासन ने बिफरते हुए कहा|
“आपके दफ्तर में| वह हम दोनों का इंतज़ार कर रहे है|” डॉ बत्रा ने कहा|
ओम और वीर उन दोनों की ओर देख रहे थे और उनकी बात सुन रहे थे| डॉ बत्रा की ओर भड़े| डॉ बत्रा दूसरी ओर मुड़कर कमरे से बहार चले गए| डॉ निवासन कमरे से बहार जाते-जाते पीछे मुड़े और वीर को अपने पीछे आने का आदेश दिया| वीर अनिश्चि से उनके पीछे गया| दो गार्ड ओम शास्त्र पर नज़र रखने के लिए वही थे|
तेल बहुत ज्यादा गरम हो चूका है, थोड़ी सी-भी देरी हुई तो कटी हुई प्याज जल जाएगी|” ओम ने पीछे से वीर को कहा| उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी|
वीर डॉ निवासन के पीछे-पीछे कमरे से बहार चला गया| रस्ते में, डॉ निवासन के ऑफिस में प्रवेश करने से पहले यह सुनिश्चित करने के लिए उसने रसोई में झाँका| वो यह देख कर आश्चर्यचकित रह गया की चूल्हे की आंच पर बर्तन रखा हुआ था और रसोइया कही नहीं थी| कटी हुई प्याज चुल्हे के पास भुनने के लिए रखी हुई थी| तेल प्रयाप्त रूप से गरम था| वीर वहां पहुंचा और प्याज को कढ़ाई में पलट दिया| रसोइया अचानक से आ गया और वीर को वह देख कर हतप्रभ रह गया|
दूसरी ओर, वीर डॉ निवासन के पीछे जाने के लिए शीग्रता से रसोई से बहार निकला| डॉ निवासन ने ऑफिस में प्रवेश करते ही वहां सबको खड़े होकर उनके इंतज़ार करते पाया| डॉ निवासन उन सबको पार करते हुए अपनी कुर्सी की ओर गए और अपने रोबीले अंदाज़ में कुर्सी पर बैठ गए| उनकी नज़र डॉ बत्रा के ऊपर थी| कमरे में तनावपूर्ण स्तिथि थी|
“वह कौन है?” डॉ बत्रा ने स्वाभाविक प्रशन्न के साथ शुरू किया|
“तेज, तुम यहां वह काम करने के लिए आये हो, जिसे करने के लिए तुम्हे यहां बुलाया गया है| तुम्हे यहां मुझसे सवाल करने के लिए नहीं बुलाया गया है|”
“मुझे जानने का अधिकार है| वह आदमी कौन है?” डॉ बत्रा ने और थोड़ा आग्रह किया| उनके पास टीम का साथ था|
डॉ निवासन बेज्जती महसूस करते हुए एकदम से खड़े होकर बोले, “नहीं, यहां तुम्हारे पास कोई अधिकार नहीं है| तुम्हारे सभी अधिकार मेरे पास सुरक्षित है|”
“सर, प्लीज शांत हो जाइये|” डॉ शाइना ने डॉ निवासन को रोकते हुए आग्रह किया| उन्होंने कहा, ओम के सम्बन्ध में हमारी अधूरी जानकारी के आधार पर हम एक अजीब से निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए मजबूर है| हम सभी बहुत बेचैन और उलझे हुए है|”
शाइना के शब्दों को सुनकर डॉ निवासन थोड़ा शांत हुए और फिर बोले, “आप में से किसी को भी डरने की कोई जरुरत नहीं है| आप सभी यहां सेफ है|” डॉ निवासन के पीछे खड़े वीर ने भी सहमति में सर हिलाया|
“हम भले ही यहां सेफ हो, लेकिन अगर वह एक आतंकवादी है तो शायद हमारी फेमिली सेफ न हो|” डॉ बत्रा ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा|
वह एक आतंकवादी नहीं है!” डॉ निवासन फिर से क्रोधित हो उठे और अपनी भारी आवाज़ में चिल्लाये| उनकी आवाज़ दूर तक गूंजती हुई प्रतीत हुई|
“आप इतने विश्वास के साथ कैसे कह सकते है?” डॉ बत्रा किसी की भी सनक और नखरून के कारण पीछे नहीं हटने वाले थे, इस समय तो बिलकुल भी नहीं|
“मुझे पता है|” डॉ निवासन ने हाथों को अपनी छाती के सामने बांधते हुए अपने आप को नियंत्रित करते हुए कहा|
“आप और क्या जानते है?” डॉ बत्रा ने पूछा| वह भी बदले में वही चीज़ कर रहे थे|
डॉ निवासन ने अपने होठ बंद ही रखे| शाइना डॉ निवासन के पास गयी और उन्हें कंधो पर थपथपाते हुए सांत्वना देते हुए कुर्सी पर बिठाया| डॉ शाइना ने उन्हें टेबल पर रखा पानी का गिलास दिया| डॉ निवासन ने पानी पिया| शाइना ने बोलने से पहले उन्हें आराम करने और सहेज महसूस करने का समय दिया|
“सर, हमे कुछ ऐसी चीज़ें पता चली है, जो हमे परेशां कर रही है और हमे कुछ खुले सूत्रों की तरफ ले जा रही है| L.S.D. प्लीज सर को संक्षेप में बताओ|”
L.S.D., ने ओम शहस्त्रा के सम्बन्ध में अपनी जानकारी का संक्षिप्त विवरण ये कहते हुए दोहराया, “सर, जिस आदमी को हम ओम शास्त्र के नाम से जानते है, उसकी देश में कई हिस्सों में कई पहचाने है| कही उसका उल्लेख खुद के पिता के रूप में है तो कहि खुद के पुत्र के रूप में| एक ही चेहरा, पर अलग-अलग नामो के साथ| मुझे उसकी अन्य पहचानो के नाम पर दो मौजूदा लॉकर और बहुत से बैंक खाते मिले है, जिसमे काफी अधिक धनराशि मौजूद है| कानूनी तौर पर वह करीब-करीब एक बेदाग़ व्यक्ति है| वह एक व्यवस्तिथ व्यक्ति दिखाई पड़ता है, जो शयद किसी भूमिगत आतंकवादी संगठन के लिए काम करता हो| वह एक अत्यंत गोपनीय मिशन पर हो सकता है, जिसका हमे अभी तक पता नहीं चला है| एक बात, जिसका हमे पता चला है, वो यह है की वो सुभाष चंद्र बॉस की खोज कर रहा है, जो शायद सरकार और देश के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय हो|”
डॉ निवासन ने गौर से L.S.D., की बात को सुना| डॉ शाइना वहां से बात को आगे ले जाते हुए बोली, “सम्मोहन निद्रा अवस्था के दौरान उसने उन लोगो के बारे में बात की है, जिन्होंने पहले युगो में इस धरती पर कदम रखा है| हममे से कुछ समझते है की उसे अपने सभी जनम याद है और कुछ सोचते है की वह दोहरे व्यक्ति का मरीज है| यह भी हो सकता है की वह प्राचीन गुप्त समूह का सदस्य हो, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुछ छिपे उद्येश्य पर कार्य करते आ रहे है; लेकिन उसकी कोई भी पहचान इनमे से किसी भी सम्भावना से मेल नहीं कहती है|”
जैसे ही डॉ शाइना ने बात करना बंद किया, उस जगह सन्नाटा छह गया| शाइना ने आगे कहा, सर, यदि आप चाहते है की हम आपकी हेल्प करें तो इसके लिए आप जो जानते है, वह हमे बताकर आपको हमारी सहायता करनी होगी|”
इस सुविधा केंद्र के पीछे का क्या राज है? हम उस आदमी को यहाँ क्यों लाये है? हम उससे क्या जानने के लिए संघर्ष कर रहे है? सर, प्लीज आप जो जानते है, हमे बताइये|” डॉ बत्रा इस बार गुस्से से ज़्यादा हताश लग रहे थे|
हमेशा की तरह डॉ निवासन ने इस बार भी अपने चेहरे पर कोई भाव प्रकट नहीं किया| उन्होंने एक गहरी सांस ली और अपने पैरो को देखने लगे, जैसे मन में कुछ हिसाब लगा रहे हो| कुछ देर बाद वह बोले, “ठीक है, मैं जो कुछ भी जनता हूँ, वह आप सबको बताऊंगा; लेकिन उससे पहले तुमने जो उसके लॉकर के बारे में बताया था, उसकी पूरी जानकारी मुझे चाहिए|”
“हो गया सर, यह लीजिये|” L.S.D. ने अपनी तरफ से डॉ निवासन को एक कागज़ देते हुए कहा, जो उन्होंने वीर को दे दिया| वीर कागज़ लेते ही कक्ष से बहार चला गया| वह जानता था की उसे क्या करना है!
डॉ निवासन ने अपनी टेबल से जुड़े लॉकर को बहुत ध्यान से खोला और उसमे से कुछ फोटोज और डाक्यूमेंट्स बहार निकाल कर डॉ शाइना को दिए, जिन्होंने एक-एक करके सब देखते हुए बाकी लोगो को भट्ट दिए| सभी फोटोज ओम शास्त्र के विभिन्न रूप और पहनावे में थी| हर तस्वीर के नीचे उसके लिए जाने वाली जगह और साल लिखे हुए थे| शाइना ने एक-एक करके उन्हें पढ़ा- 1874 बनारस में, 1882 हरयाणा में 1888 मद्रास में, 1895 महाराष्ट्र में, 1902 करेला में, 1916 लखनऊ में,
1930 सत्यग्रह आंदोलन, 1944 में सुभाष चंद्र बॉस की सेना के फॉरवर्ड ब्लॉक में, 1964 में जवाहरलाल नेहरू के अंतिम संस्कार में, 1991 में राजीव गाँधी के अंतिम संस्कार में, 1998/2001/2005/2010/2011/2012/2013/2014/2015…
डॉ निवासन ने ध्यान से सभी के चेहरों को पढ़ते हुए कहा, “यह सब मृत्यु प्रमाण-पत्र और कुछ सरकारी रिकार्ड्स है, जो इस बात की पुष्टि करते है कीओम शहस्त्रा द्वारा उपयोग किये गए सभी नामो की मृत्यु हो चुकी है; पर जब वह किसी जगह पर मर जाता है तो दूसरी किसी जगह पर जीवित हो जाता है| उल्लेखनीय रूप से, वह हर तस्वीर में एक ही उम्र का है, न ही जवान और न ही बूढा, लगभग 40 वर्ष का|” समझने का समय देते हुए डॉ निवासन कुछ देर चुप रहे और दुबारे गंभीरता से बोले, “इसीलिए तुम सब यहाँ हो और तुम्हे यहां मुझसे यह प्रश्न करने के लिए नहीं बुलाया गया है की वह आदमी कौन है, बल्कि मैं यहां तुम लोगो से इस आदमी के बारे में जानकारी लेने के लिए उपस्तिथ हूँ| तुम सभी यहां इस रहस्य्मय आदमी के बारे में जवाब और उचित जानकारी पता लगाने के लिए एक गोपनीय मिशन का हिस्सा हो| याद रहे, गुप्त मिशन!”
डॉ बत्रा का मन शंकाओ से भरा हुआ था और वह अपने आप को रोक नहीं सके|
“इस संसथा का मालिक कौन है?” डॉ बत्रा ने सीधे तरीके से पूछा| unexpectedstories.in
“बहुत हो गया, तेज! तुम्हे बस, इतना ही जान्ने की आवश्यकता है| अब तुम्हारे पास केवल दो विकल्प है-अपने काम पर वापस लग जाओ या अपना सामान बांधो; तुम्हारी वापसी का प्रबंध मैं करवा दूंगी|”
डॉ निवासन ने चेतावनी देते हुए कहा| वह अपनी आवाज़ में तिरस्कार की भावना नहीं छुपा पाए|
डॉ बत्रा स्थिर खड़े रहे| वह प्रयोगशाला में वापस जाने के लिए मुड़ने ही वाले थे के तभी डॉ शाइना बोल पड़ी, “सर, हमे हफ्तों लग जाएंगे पूरी जानकारी को प्राप्त करने के लिए, क्योंकि ओम शास्त्र को हर घंटे में होश आ जाता है|”
“क्या तुम्हारे पास कोई और सुझाव है?” डॉ निवासन ने ऐसे पूछा, जैसे वह पहले से ही अत्तर जानते हो|
“जी सर, मेरा सुझाव है की हम उससे सीधे तरीके से बात करे, बिना किसी बेहोश करने वाली ओषधि या सम्मोहन के|” डॉ शाइना ने प्रस्ताव रखा|
“मुझे डर है की वह इस तरीके से कुछ नहीं बोलेगा|” डॉ निवासन ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा|
“वह बोलेगा, सर उसे इस बात का कोई अंदाजा नहीं है की उसने अभी तक अपने बारे में कितना खुलासा किया है! हम उसे यह विश्वास दिला सकते है की हम उसके बारे में सब कुछ जानते है और फिर वह होश में रहते हुए भी सब कुछ बताएगा|”
“ये आप सबके लिए एक जोखिम भरी प्रक्रिया हो सकती है|” डॉ निवासन ने चेतावनी देते हुए कहा|
डॉ शाइना यह जान चुकी थी की डॉ निवासन से कैसे व्यव्हार करना है और कैसे अपनी बात को मनवाना है| उनके इस समझदारीपूर्ण तरीके में ताक़त थी, जो किसी दबंग व्यक्तित्व को भी काबू में कर सकती थी|
इसलिए उन्होंने कहा, “सर, मैंने बहुत से अपराधियों से पूछताछ की है और अपने अनुभव से मैं आपको यह विश्वास दिला सकता हूँ की इस आदमी से डरने की जरुरत नहीं है|”
“मुझे नहीं लगता की हम उस पर बिना ड्रग या सम्मोहन के विशवास कर सकते है|” डॉ निवासन ने अपनी धारणा पर कायम रहते हुए कहा|
“उसकी चेतना से मुख तक आते-आते सत्य के सवरूप में बदलाव की सम्भावना हमेशा रहेगी|”
“हम लायी डिटेक्टर का उपयोग कर सकते है और L.S.D.उसे देखने और पढ़ने में हमारी सहायता कर सकती है|” डॉ बत्रा ऐसे बोले, जैसे बहुत ही महत्वपूर्ण योजना बता रहे हों|
“सर, कुछ उपकरणों को मोटे तारो की मदद से उसके शरीर से जोड़ा जायेगा, जो उसकी धड़कने और विचारो की तरंगो नॉट करके स्क्रीन पर दर्शया के रूप में परिवर्तित कर देगी| यदि वह सही प्रतिक्रिया करता है तो हम उसकी स्मृतियों का सटीक प्रतिबिणभ देख सकते है-युग और समय के सूक्षम विवरणों के साथ| मैंने सही कहा न, L.S.D.?” शाइना ने कहा|
“यह बहुत मजेदार होगा! L.S.D., ने चकते हुए सुर में सुर मिलाया| उसके मुँह में च्विंगम होने की वजह से उसने यह शब्द कुछ लड़खड़ाते से बोले, जिसका उसे कुछ अफ़सोस भी नहीं था| उसके यह कहते ही सबने एकदम उसकी तरफ देखा, जैसे कह रहे हो, “इसे क्या हुआ?” सबकी इस भाव-भंगिमा की प्रतिक्रियासवरूप उसने एकसूम च्विंगम चबाना बंद कर दिया और शांति से काम में लग गयी|
सर, शब्द झूठे हो सकते है, लेकिन विचार स्वेच्छा अनुसार नियंत्रित नहीं किये जा सकते| यदि हम उसके विचारो का दृश्य देख पाएंगे तो वह हमसे झूट नहीं बोल पायेगा|” शाइना ने कहा|
डॉ निवासन सभी संभव परिणामो के बारे में अपने मस्तिक्ष में सोच-विचार कर रहे थे, जबकि सब लोग उनके इशारे का इंतज़ार कर रहे थे|
शाइना ने विनती करते हुए कहा, “सर, अब आपकी बारी है, अपने द्वारा चुने गए सर्वश्रेस्ठ विशेषज्ञों पर भरोसा करने की|”
डॉ निवासन सहमत होने के लिए मजबूर थे| किन्तु हामी भरने से पहले उन्होंने पूछा, “यदि यह सफल नहीं हुआ तो?”
“फिर हम वही तरीके अपनाएंगे, जो हम अब तक करते आ रहे है|” डॉ बत्रा ने आश्वासन देते हुए कहा|
“सर, अब तक यह बहुत मुश्किल रहा है| उसके द्वारा बोले गए सभी वाक्यों ने नए सवाल खड़े कर दिए है और मुझे अब इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं है की उससे क्या पूछा जाये?” शाइना ने कहा|
“ठीक है, जो भी तुम्हे ठीक लगे, उसके साथ आगे बढ़ो; लेकिन शाइना, सतर्क रहना| एक आवशयक दूरी जरूर बनाये रखना| कोई रिकॉर्ड नहीं होगी| हम दोपहर के खाने के बाद शुरू करेंगे|” डॉ निवासन चिंतित थे|
सभी दोपहर के भोजन के लिए भोजन कक्ष की ओर आगे बढे; लेकिन डॉ शाइना प्रयोगशाला की ओर गयी| वह ओम की तरफ बढ़ी और उसके सामने खड़ी हो गयी| उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हेलो! मेरा नाम शाइना है| मुझे पहले अपना परिचय देने का मौका नहीं मिला था| ओम तुम अपना भोजन कर लो| इस बीच मैं दुसरो के साथ हूँ| अगर तुम्हे किसी चीज़ की जरुरत पड़े तो मुझे जरूर बताना|” शाइना ने ओम से निकट ता का प्रयास किया, क्योंकि भोजन के बाद उसे उसकी चेतन अवस्था में बातचीत करने का काम करना था| मनोविज्ञान यह कहते है की यदि आप एक बार किसी व्यक्ति का विश्वास हासिल कर लेते है तो आपको उसके सभी राज़ भी पता लग जाते है|
“मैंने उनसे अनुरोध किया था की मुझे खोल दे| मैं विश्राम कक्ष का प्रयोग करना चाहता था|” ओम ने विनम्रतापूर्वक कहा|
“ओह्ह! अवश्य, ओम | दरअसल, वह तुमसे बात करने या खुद कोई निर्णेय लेने के लिए अधिकृत नहीं है| असुविधा के लिए शमा करो|” शाइना ने आदरपूर्वक कहा|
उन्होंने ओम शास्त्र को विश्राम कक्ष तक साथ ले जाने के लिए एक गॉर्ड को आदेश दिया|
शाइना अब दूसरे सेशन के लिए आश्वस्त थी, क्योंकि ओम उनके प्रति सुरक्षात्मक या रुखा नहीं था|
जैसे ही गॉर्ड ने आदेश का पालन किया, ओम मुड़ा और उसने कहा, “एक और बात, मैं शाकाहारी हूँ और मुझे पत्ता गोभी पसंद नहीं| मैं आलू और दाल खा सकता हूँ| हरी मिर्च और नमक कृपया अलग से|” ओम ने अपने खाने का तरीका बताते हुए कहा|
शाइना की समझ में नहीं आया, लेकिन उसने सर हिलाया| वह प्रयोगशाला से बहार चली गयी और जैसे ही वह भोजन कक्ष में पोहंची, मेनू देखकर विचलित हो गयी| उन्होंने देखा की मांसाहारी भोजन परोसा जा रहा है और दो सब्जियां-आलू और पत्ता गोभी| वह अपने आप को सँभालते हुए बोली, ओम के लिए मांसाहारी खाना मत भेजना और न ही पत्ता गोभी| वह नहीं खाता है|”
आपको कैसे पता?” L.S.D. हैरान थी|
“उसी ने मुझे बताया|” शाइना ने जवाब दिया|
“क्या?” L.S.D., ने पूछा|
“यही की शाकाहारी है और उसे पत्ता गोभी भी पसंद नहीं है और यह की उसे हरी मिर्च और नमक अलग से चाहिए|”
सब एक दूसरे को आश्चर्य से देख रहे थे, जबकि शाइना ने अपना भोजन करना शुरू कर दिया था|
L.S.D., कुछ देर सोचने के बाद धीरे से बोली, “खाने के मेनू में आलू और पत्ता गोभी है, यह बात उसे कैसे पता चली? इसके अलावा, यदि वह शाकाहारी है तो उसे कैसे पता चला की मांसाहारी खाना पकाया जा रहा है?”
शाइना यह सुनकर बीच में ही रुक गयी और गहरे विचारो में खो गयी|
Follow me on my social media accounts:-
Facebook-https://www.facebook.com/hemant.salwan.1/
Instagram:-https://www.instagram.com/hemantsalwan2/?igsh=MWg1amtpOWt4ZGYybA%3D%3D#