अध्याय :- 7 मौजूदगी का प्रदर्शन

unexpectedstories.in सभी लोग उसी कमरे में इक्कठे हुए और अपनी-अपनी जगह पर बैठ गए| शाइना ओम के बराबर वाली कुर्सी पर बैठ गयी| उन्होंने अपनी गर्दन को खीचते हुए यह सुनिश्चि करने के लिए देखा की गार्ड्स इस बार सबकी सुरक्षा हेतु आस पास ही रहे| इस बार सभी लोग सिटीथी की संवेदनशीलता को समझ पा रहे थे| वह कुछ महसूस कर रहे थे और कुछ डरे-डरे-से थे|

डॉ निवासन ओम के करीब आये और उसके सामने झुकते हुए बोले, हम तुम्हे क्या बुलाये? ओम? तुमने बंकिम? शायद मधुकर? गुरुशील सही रहेगा? या तुम विधुर पसंद करोगे? आश्चर्य हुआ? तुमने बहुत सी चीज़ों का खुलासा कर दिया है| अब या तो हम बाकी चीज़ें भी उसी तरह जान लें या तुम खुद हमे बता दो| मर्जी तुम्हारी है| जबरदस्ती या सच्चा से? किसी भी तरह, हम जो चाहते है, उसे हासिल कर लेंगे| क्या कहते हो?” डॉ निवासन ने तिरस्कारपूर्ण हसनी के साथ कहा|

ओम ने कुछ नहीं कहा| उसके चेहरे से लग रहा था की वह हार मान चूका है| वह एक चोर की तरह परेशां लग रहा था, जिसे अभी-अभी बताया गया हो की उसके द्वारा छुपाये गए 10 लाख डॉलर का खज़ाना मिल गया है|

डॉ निवासन सीधे खड़े होकर दूर चले गए और ओम को नयी प्रक्रिया समझाने के लिए डॉ शाइना को आदेश दिया|

शाइना ने उसका पालन किया|

ओम, हम तुम्हे एक झूठ पकड़ने वाले उपकरण से जोड़ने जा रहे है, जो तुम्हारे विचारो की तरंगो को दर्शय में परिवर्तित करके स्क्रीन पर दिखायेगा|” शाइना ने विनम्रतापूर्वक कहा, जैसे एक माँ अपने बच्चे को समझाती है, जिसे टिका लगने वाला हो|

“जिसका मतलब है…”ओम ने धीरे से कहा| तभी डॉ बत्रा एकाएक बीच में बोले, “जिसका मतलब है की तुम झूठ नहीं बोल सकते, क्योंकि तुम्हारे विचार उतने ही स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होंगे, जैसे तुमने उन्हें जिया है| मुझे यकीन है की तुम्हे इस बात से की आपत्ति नहीं होगी| क्या तुम्हे है?” डॉ बत्रा ने पूछा| unexpectedstories.in

“क्या मेरे पास कोई विकल्प है?” ओम ने कहा|

नहीं! डॉ बत्रा, शुरू करे|” डॉ निवासन ने आदेश देते हुए कहा|

“जी सर!” डॉ बत्रा ने जवाब दिया|

ओम ने शाइना की ओर देखा, जो पहले से ही उसकी ओर सहानुभूति से देख रही थी| डॉ निवासन प्रोग्शाला से बहार गए और अपने ऑफिस की ओर जाते वक़्त उन्होंने वीर को फ़ोन किया|

“वीर, रिपोर्ट!” उन्होंने आदेश दिया|

दूसरी ओर से वीर ने जवाब दिया, “सर, हमारे लोगो ने उन लॉकरों को जप्त कर लिया है| वह कुछ देर में वहां पोहचते ही होंगे|”

डॉ निवासन ने आदेश दिया की जो कुछ भी उस लाकर में है, वो जल्द-से-जल्द उनके पास लाया जाए|

वीर ने लाकर का स्थान और पता देखते हुए कहा, “सर, उसे अपने पास ही समझिये|”

डॉ निवासन ने पूछा, “तुम्हे और कितना समय चाहिए?”

वीर ने कुछ पल के लिए यात्रा के समय का हिसाब लगाने के बाद कहा की वह चीज़ उनके मेज पर प्रातःकाल रहेगी| यह कहकर वीर चला गया| निवासन ने डॉ बत्रा और टीम के बाकी सदस्यों से बात करना जारी रखा|

डॉ निवासन के ऑफिस के बहार वीर ने कुछ फ़ोन लगाए और दिए गए काम को समय पर पूरा करने की व्यवस्था की|

वीर (फ़ोन पर)- “मुझ तक पोहचने में कितना समय लगेगा?” दूसरी ओर से उत्तर सुनने के बाद वीर ने कहा, “अपने पीछे कोई सबूत मैट छोड़ना| मेरे आदमी तुम्हे एक मुहरबंद लिफाफा देंगे| उसे हासिल करने के बाद उसे लिफाफे में दिए गए पते पर पहुंचना और उस व्यक्ति को देना, जो तुम्हे यह कोड बताएगा- 2HD172ILU, जो 100 रुपए के नोट पर एक सीरियल नंबर में लिखा होगा|”

वीर ने फ़ोन रख दिया और दूसरा नंबर दायिल किया|

वीर (फ़ोन पर)- “आज रात तक तुम्हे उसी पते पर पार्सल मिल जायेगा| उसे सुरक्षित रखना| तुम्हारा कोड है- 2HD172ILU| प्रातःकाल पार्सल सुरक्षापूर्वक हेलीकाप्टर के पायलट तक पंहुचा देना| तुम्हारा भुगतान तुम्हारे खाते में पहुंच चूका है और 100 रुपए का नोट समय से पहले तुम तक पहुंच जायेगा|”

प्रयोगशाला में L.S.D., और डॉ। बत्रा सभी तारो को सही स्थान पर लगा रहे थे और ऐसा करते हुए एक-दूसरे से बातचीत कर रहे थे|

अभी इस दौरान शाइना को प्रश्नो की सूचि बनाने में सहयता कर रहा था|

“आपको सुषेण से शुरू करना चाहिए| उसके द्वारा खुलासा किये गए नामो में से उसका अपना एक नाम|” अभी ने सुझाव दिया|

“विशेष रूप से सुषेण क्यों? कोई और नाम क्यों नहीं?” शाइना व्यग्र थी|

क्योंकि यह मेरे विचार से सबसे पुराण है और इस उलझे हुए धागे का एक सिरा है, जिसक दूसरा सिरा ओम शास्त्र है; या आप सतयुग के बारे में उसकी जानकारी पूछकर भी शुरू कर सकती है|”

मैं कुछ उलझन में हूँ| सुषेण कौन था?” शाइना ने शमशीता के साथ अधिकारपूर्ण स्वर में जानने की इच्छा रखते हुए पूछा|

ठीक है! त्रेता युग में, जो सतयुग के बाद आता है, रामायण के दौरान राम और रावण के बीच युद्ध में लक्ष्मण को रावण के बेटे मेघनाथ ने घातक बाण मारा था| ये कहा जाता है की केवक एक ही जड़ी-बूटी में लक्ष्मण के जीवन को बचाने की क्षमता थी, जिसे संजीवनी बूटी’ कहा जाता है, जो हिमालय में द्रोणगिरि पर्वत पर पायी जाती थी| जिन वेध ने संजीवनी बूटी का सुझाव दिया था, वह सुषेण थे| अपने श्री हनुमान जी की महाकाल तस्वीर, अपने बाये हाथ में पर्वत के साथ उड़ते हुए देखि होगी| इसका मतलब है, सुषेण वह है, जिन्होंने रामायण में, कथाओ के अनुसार, संजीवनी बूटी मंगवाकर लक्ष्मण की जान बचायी थी, जिसके लिए हनुमान जी ने पूरा पर्वत उठा लिया था|” अभी ने समझाया|

“तो तुम कहना चाहते हो की सभी नामो के बीच सम्बन्ध जान ने के लिए सुषेण से शुरू करना होगा, यानि की त्रेता युग?” शाइना ने अपने मस्तिक्ष से संदेह के बादलो को हटाते हुए कहा|

“आपने मुझसे जो कहा, मैंने वही किया और मुझे कुछ मिला|” L.S.D., ने कहा|

“क्या?” अभी ने उत्सुकता से पूछा|

“विधुर को धृतराष्ट्र का भाई माना जाता है, जो अपने समय के सबसे ग्यानी और समझदार व्यक्ति थे|”

“और संजय?”

“संजय धृतराष्ट्र के सलाहकार थे, जिन्होंने संसार को देखने के लिए उनकी दृष्टि की तरह भी कार्य भी किया था| उनके पिता गवेगळं थे|”

“यानि में सही था|” अभी ने आपने सामान्य गर्व के साथ कहा और L.S.D. ने उसके गर्व को और बढ़ाते हुए स्वीकारा, “हम्म! ऐसा ही लगता है|”

“बिलकुल! आप देख रही है, ये पागलपन लगता है, लेकिन में गंभीर हु| इस आदमी और त्रेता युग के आदमी के बीच जरूर कोई सम्भन्ध है| और ये बहुत अजीब है की हमारे सभी जवाब एक ही व्यक्ति के पास है- ओम शास्त्र के| इसलिए हमे वही से शुरू करना चाहिए|”

ओम को झूठ पकड़ने वाली मशीन के जोड़ने के बाद डॉ भात्रा बड़ी उत्सुकता से आपने कंप्यूटर में लग गए| ये देख शाइना भी अभी को छोड़ डॉ बत्रा के साथ शामिल हो गयी| जैसे ही डॉ निवासन ने प्रयोगशाला में प्रवेश किया, डॉ बत्रा ने उन्हें आवाज़ लगते हुए कहा, “सर, हम तैयार है|”

डॉ निवासन ने शुष्क दृष्टि से देखते हुए जवाब दिया| “तो शुरू करो|”

ओम, कृपया सहयोग करो| मैं तुम्हे विश्वास दिलाता हूँ की तुम्हे कोई नुक्सान नहीं होगा|” शाइना ने निवेदन करते हुए कहा|

ओम ने अधूरे मान से सर हिलाया| डॉ तेज और L.S.D. ने मोटे तारो और केबल्स को ओम के शरीर से जोड़ा|

कुछ ही शानो में ओम ने खुद को जकड़ा हुआ पाया| तारा उसके सर, छाती, हाथ और पेरो से दो विपरीत दिशाओ में जा रहे थे| उसके सर से जुड़े तार आगे कंप्यूटर और मशीन से जुड़े थे, जो वही दूसरी तरफ प्रोजेक्टर स्क्रीन से जुड़े हुए थे और बाकि के सीधे लिए डिटेक्टर में जा रहे थे| डॉ बत्रा और L.S.D. ने आपने हिस्से की तैयारी कर दी थी और ओम ने भी अपनी आँखें बंद कर ली|

शाइना ने अभी की सहायता से आपने परेशान तैयार कर लिए थे| सभी शुरू करने के लिए तैयार थे; सभी लाइट्स बंद कर दी गयी थी| अँधेरा चाह गया था| जो रौशनी मौजूद थी, वो कंप्यूटर स्क्रीन से आ रही थी| L.S.D. ने आपने सिस्टम पर कुछ बटन दबाये और आखिर में एंटर दबाया| जैसे ही उसने ये किया, कुछ पीने ने कागज़ पर ग्राफ की आकृति बनाते हुए कुरेद दिया| कुछ शानो के लिए स्क्रीन पर कुछ छवियाँ प्रदर्शित हुई और चली गयी| ओम ने अपनी आँखें खोल दी थी|

जब ओम की आँखें खुली होती थी, तब स्क्रीन पर कुछ नहीं दीखता था| जैसे ही वो पालक झपकते, कमरे में रौशनी बाद जाती| स्क्रीन पर दिन का समय, स्थान, लोगो का पहनावा, मौसम, संस्कृति प्रदर्शित हो रहा था| इन् सबका कोई मतलब न निकलते हुए सब कुछ बहुत तेजी से चल रहा था| कमरे में गार्ड्स चौकन्ने हो गए थे और किसी अनचाही प्रक्रिया से बचने के लिए उन्होंने अपनी बंदूके लोड कर ली थी| कमरे में लोगो के चेहरों पर भी उलझन दिख रही थी, क्योकि ओम के विचार भोत तेजी से बदल रहे थे| शाइना को एहसास हुआ की ओम के विचारो को नियंत्रित करना जरुरी है, जिसके लिए ओम को शांति और सुरक्षा का भाव महसूस कराना होगा|

ये करने के लिए शाइना ने ओम के कंधे को पकड़ा और कोमल स्वर में कहा, “ओम सब ठीक है| शांत हो जाओ| तुम अकेले नहीं हो| अपनी आँखें खोलो और मुझे देखो| गहरी सांस लो और आपने शरीर को ढीला छोड़ दो| आराम करो और खुद को तनाव- रहित महसूस करो|”

जैसे ही शाइना ने कहा, वैसे ही स्क्रीन पर तस्वीरें धीरे-धीरे बदलने लगी और दृश्य स्पष्ट रूप से दिखने लगी| तस्वीर एक के बाद दूसरी बदलने से पहले कुछ देर के लिए ठहरने लगी|

डॉ निवासन ने गार्ड को चौकन्ना रहे का आदेश दिया| उनकी आवाज़ ॐ के कानो में पड़ी और डॉ निवासन ने खुद को स्क्रीन पर देखा| इसके बाद एक गाओ का दृश्य उत्पन्न हुआ| बेहटा पानी और हर जगह हरियाली का दृश्य दिखाई दिया| डॉ निवासन ने गहरी नज़रूँ से देखा और वो गंभीर हो गए| उसके बाद एक सरकारी विद्यालय, घिसी हुई लकड़ी की बेंच पर बैठे कुछ बचे और कुछ अंग्रेज आदमी ईस्ट इंडिया कंपनी की पोषक पहने हुए थे| तस्वीर भारत की सवतंत्रता से पहले की लग रही थी| तस्वीर देख कर डॉ निवासन को ऐसा झटका लगा, जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया था|

शाइना के अलावा सभी ने इस भाव-परिवर्तन और सहेज हाव-भाव को महसूस किया|

शाइना ने कहा, “ओम, क्या तुम ये करने के लिए तैयार हो?” और जैसे ही उन्होंने ये कहा, स्क्रीन काली हो गयी|

“हम्म!” ओम शास्त्र से जवाब आया|

लिए डिटेक्टर में से ‘बीप’ की आवाज़ आयी, जिसका अर्थ था की ॐ सच में तैयार नहीं था| सभी की नज़रे ‘बीप’ की और मुड़ी, ओम की भी| उसने फिर शाइना को देखा, जिनके चेहरे पर हलकी मुस्कान थी| वो परिपक्वता के साथ बोली, “सब ठीक है| मैं समझती हूँ, पर हमे अब शुरू करना होगा| ओम, जब तुम अपनी आँखें खोलते हो तो हम दृश्य नहीं देख पाते है| इसलिए, तुम्हे अपनी आँखों को बोलते समय बंद रखना होगा|” उन्होंने समझाया|

ओम ने शांति से अपनी आखें बंद कर ली| शाइना ने पहले डॉ निवासन की ओर देखा और फिर डॉ बत्रा की ओर| दोनों ने धीरे से सर हिलाया| शाइना ने गहरी सांस ली और प्रक्रिया को शुरू किया|

“सुषेण कोण है?” शाइना ने आपने पहला सवाल पूछा|

ओम कुछ देर के लिए शांत था; लेकिन वो जनता था की उसकी स्मृतियाँ सब कुछ बता देगी, इसलिए वो बोलै, “वो में था|”

उसने जैसे ही ये कहा, स्क्रीन पर एक गाओ और डीप के जंगल की तस्वीर आ गयी| नंगे पैर, धनुष और बन्द्द लिए हुए, आदिवासी लोगो को कम्म, लेकिन साफ़ कपड़ो में देखा जा सकता था| पोधो और फूलो की अद्भुद प्रजातियां, पहाड़ो और उसके झरने के साथ वो एक उपजाऊ जमीन प्रतीत हो रही थी|

“ये कौनसी जगह है?” शाइना ने पूछा|

“दक्षिण भारत का एक गाओं|” ओम ने जवाब दिया|

” तुम वह क्या कर रहे थे?”

“मैं वह एक वेध था| लोग विभिन उपचारो के लिए मेरे पास आते थे| मैं पहाड़ो पर उगने वाले हर एक जड़, चल, पत्ते और फूल के बारे में जानता था| मुझे हर बीमारी और उसके इलाज के बारे में पता था|”

वास्तव में ये गाओं कहा है?” प्रोत्साहित करते हुए शाइना ने पूछा|

“गाओ का नाम सुचिन्द्रम है| ये अब कन्याकुमारी जिले, तमिलनाडु के अंदर आता है|”

“तुमने किसकी जान बचाई थी?”

” मैंने कई जाने बचाई थी, जिसमे से एक लक्समन| मैंने योध के दौरान कई लोगो और वनरू की भी सेवा की थी|”

” तुम्हारा मतलब है, रामायण के लक्षमण?” शाइना ने सुनिश्चित करने के लिए पूछा|

“हाँ|”

ओम ने सोचना शुरू किया और उसके ऐसा करते ही एक आदमी की छवि स्क्रीन पर मूर्त हो गयी-लम्बी दाढ़ी, केसरिया रंग के कपडे और लुंगी, लकड़ी की खड़ाऊ और सर पर पगड़ी| उनके अस्स पास निश्चित रूप से पौधे और जड़ी-बूटियां थी और सामने कुछ असामान्य बर्तन वे मलहम थे तथा पानी में घुली हुई कुछ जड़ी-बूटियां| आदमी ओम शास्त्र से बिलकुल मेल खाता हुआ था| वही चेहरा, वही आदमी, जो वो आज है| आदमी एक बेहोश शरीर के पास बैठा हुआ था| उसके बराबर में एक और आदमी बेहोश व्यक्ति का हाथ पकड़कर रू रहा था| वह पर बहुत सारे वानर मुख वाले मनुष्य थे, जो सभी चिंतित नज़र आ रहे थे| ये स्पष्ट था की स्क्रीन पर दिख रहे पत्र और कोई नहीं, बल्कि सुषेण, भगवन राम, लक्ष्मण और हनुमान थे|

“ये कैसे संभव है? तुम आज भी कैसे जीवित हो?” शाइना ने इस झटके को दबाते हुए साफ़ शब्दों में पूछा|

“मैं तब से वृद्ध नहीं हुआ हु| मुझे बोहोत बार थकन महसूस होती है, लेकिन बिना खाये और आराम किये ही मैं आपने आप ऊर्जा से भर जाता हूँ| मुझे चोट लगती है, मैं बीमार पड़ता हु; लेकिन इससे पहले की मृत्यु मुझे आपने अंदर समां ले, मैं स्वस्थ होना शुरू कर देता हूँ| मैं मरता नहीं हु|” ओम ने खुलासा किया|

कमरे की शांति असहजता में बदल गयी और माहौल कुछ उदास हो गया|

शाइना शायद ही किसी चीज़ पर विश्वास कर पा रही थी, लेकिन फिर भी आगे बड़ी और पूछा, “तुम उस समय कैसे दीखते थे?”

अचानक से डॉ बत्रा अपनी कुर्सी से खड़े हुए और चीखते हुए बोले, “ये सब बकवास है! नहीं, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता|”

जैसे ही वो गुस्से में गरजते हुए बोले, उन्होंने दरवाजे की और चलना शुरू कर दिया|

ओम ने अपनी आँखें खोली और कमरे में अँधेरा चा गया| एक गार्ड ने बिजली जलाई| डॉ निवासन और शाइना डॉ बत्रा का रास्ता रोकने कइ लिए उनकी और भागे|

डॉ बत्रा की आवाज़ गुंजी, “सर, हम यहाँ एक मानसिक रोगी के साथ काम कार रहे है| मैं ये और नहीं सेह सकता| वो यहाँ कल्पनाएं गढ़ रहा है!”

“फिर ले डिटेक्टर कोई आवाज़ क्यों नहीं कर रहा है?” डॉ निवासन ने तर्क करते हुए पूछा|

” क्योकि उसकी नबज़ सामान्य है, जब कोई झूट बोलता है तो उसके रक्तचाप में उतार-चढ़ाव होता है और दिल की धड़कने बढ़ जाती है| हमारी मशीन ऐसे बदलाव के अनुसार हमे सूचित करती है|” डॉ बत्रा ने कारण सहित उत्तर दिया|

“और जो तस्वीर हम देख रहे है?” डॉ निवासन ने चुनौती देते हुए पूछा|

“जो तस्वीर हम देख रहे है, वो उसकी यादें नहीं, बल्कि उसकी कल्पनायें है, जिन्हे वो सच मानता है| वो अपनी कहानियों और विचारो से प्रभावित है और इस जूनून ने उसे ये विश्वास दिलाया है की जो कुछ भी वो बोल रहा है, वो वास्तव में उनका एक हिस्सा है| वो अपनी कल्पनाओ को ऐसे पड़ता है, जैसे उसने उन्हें जिया हो!” डॉ बत्रा ने स्पष्ट किया|

“कल्पनाये धुंधली होती है, तेज! वो कभी भी इतनी स्पष्ट नहीं हो सकती, जितनी हम अभी उन्हें देख रहे है| केवल वास्तविक घटनाओ और लोगो को ही हमारे विचारो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है|” डॉ बत्रा के व्यवधान से उत्तेजित होकर डॉ निवासन ने कहा|

“बिलकुल सही! और ये आदमी बहोत दृढ़ता के साथ सोचता है की ये सब सुच है| इसलिए वो इसे कभी भी कल्पना के रूप से सोचता ही नहीं है| उसका मन्ना है की वो वह मौजूद था और ये सब उसने जिया है|” इस स्तिथि पर डॉ बत्रा आपने विचारो में और अधिक दृढ हो गए|

“सर, भारतीय पौराणिक ग्रंथो, जैसे रामायण और बाकि सब में ये सब विशद रूप से वर्णित है और उसने इतनी गहनता से उन् ग्रंथो का अध्यन किया है की वो ये सोचने लगा है की वो वास्तव में उनका हिस्सा है| उसे कभी एहसास नहीं होता की वो झूट बोल रहा है| वो बीमार है, सर| ये एक असामान्यता है और इसके जैसे मामले दुनिया भर में कई है|” डॉ बत्रा ने जोर देते हुए कहा|

“सेशन को यही समाप्त करना पड़ेगा|” डॉ निवासन ने अपनी घडी देखते हुए कहा|

“हम कल जारी रखेंगे| अब सभ रात के खाने के लिए इकठी हो जाइये|” ये कहकर वो वह से चले गए|

कुछ ही समय में पूछताछ कक्ष खली हो गया| सुरक्षाकर्मी ओम को एक गुप्त स्थान पर ले गए और उसे हथकड़ी लगा दी गयी| चारो और से सुरक्षाकर्मियों ने उसे घेर रखा था|

बाद में, सभी लोग दिन के बारे में चर्चा करने लगे| जैसे ही उनका भोजन समाप्त हुआ, डॉ बत्रा ने पूछा, “अभी और प्रेम, इस मामले में आपने विचार हमे बताओ|”

“क्या यहाँ पर किसी ने अश्वथामा और परशुराम के बारे में सुना है?” अभी ने पूछा|

” हाँ |” भोले प्रेम ने कहा|

“हाँ, केवल उसके बारे में सुना है|” डॉ बत्रा ने बताया|

” उनके बारे में कभी नहीं सुना|” शाइना ने धीरे से कहा|

प्रोधोगिकी में दक्ष L.S.D. ने जवाब दिया, “अभी इन्हे गूगल किया और कुछ समझ आया|”

“ठीक है! नाम में ‘परशु’ शब्द एक फरसा को दर्शाता है| परशुराम का शाब्दिक अर्थ है- ‘फरसे के साथ राम’| वो विष्णु भगवान् के कहते अवतार और रेणुका और ऋषि जमदग्नि के पांचवे पुत्र थे| हिन्दू धर्म में वो सात चिरंजीवियों में से एक है| परशुराम को ज्यादातर इकीस बार शत्रियूं का संहार करने के लिए जाना जाता है, जब शक्तिशाली राजा कार्तवीर्य ने उनके पिता की हत्या कर दी थी| भार्गव परशुराम की ऐतिहासिक विरासत हैहय राज्य से प्रारम्भ होती है, जो आज के आधुनिक मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के पास महेश्वर में स्तिथ है| उन्होंने भगवन शिव को कठोर तपस्या से प्रसन्न करके एक फरसा हासिल किया था, जिन्होंने इसके बाद उन्हें योध कला भी सिखाई|”

“उनकी परम भक्ति तिव्रर इच्छा और निरंतर धियान से प्रसन्न होकर भगवन शिव ने श्री भार्गव राम (उनका असली नाम) को दिव्य स्त्रोतों से पुरस्कृत किया था, जिसमे नष्ट न होने वाला अजय परशु शामिल था, जिससे उनका नाम ‘परशुराम’ पड़ा| तब भगवन शिव ने परशुराम को आदेश दिया की वो पृथ्वी को दुराचारियो, रक्षा और अहंकारियों से मुक्त करे| परशुराम विष्णु के अनन्य अवतार श्री राम और श्री कृष्णा को देखने के लिए काफी समय तक जीवित रहे| परशुराम के पास देवताओ के राजा इंद्रा द्वारा दिया गया भगवान् शिव का विजय धनुष भी था| ‘रामायण’ में परशुराम ने वो धनुष राजकुमारी सीता के सवनवा के लिए उनके पिता जनक को दिया था| उम्मीदवारों के बल की परीक्षा हेतु उन्हें उस रहस्यमयी शास्त्र को उठाकर उसकी प्रत्यंचा चांदनी थी| श्री राम के अतिरिक्त और कोई भी सफल नहीं हुआ| लेकिन जब श्री राम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने की कोशिश कर रहे थे तो उनसे वो धनुष टूट गया, जिससे एक भयंकर गर्जना हुई, जो महेंद्र पर्वत की छोटी पर ध्यान में लीं परशुराम के कानो तक पोहोच गयी| क्रोधित परशुराम श्री राम का वध करने पोहोंचे और तब उन्हें एहसास हुआ की राम भी भगवान् विष्णु के अवतार थे|”

“परशुराम ने रामायण और महाभारत में भीष्म, कारन और द्रोण के गुरु के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी| द्रोण अधिकतर द्रोणाचार्य के रूप में जाने जाते थे| आचार का अर्थ है– ‘शिक्षक’| वो सौ कोरवो और पांच पांडवो के गुरु थे|” अभी हिन्दू धर्म से संभंधित अवधारणाओं और तथ्यों को समझने में निपुण था|

” अब हम क्यों भटक रहे है? अभी, तुम क्या बात कहना चाहते हो?” शाइना का हिन्दू धर्म पर लम्बे-लम्बे व्याख्यान सुनने का मैं नहीं था|

“कहानी का सार ये है की परशुराम हर युग में प्रकट हुए है और वो अमर है|”

“अभी, तुमसे ये कहानियां सुनना बोहोत दिलचस्प है और तुम इन्हे अच्छी तरह से सुनते भी हो| ये मेरे ज्ञान को और बढ़ा रही है और शायद पूछताछ में भी काम आएगी|” डॉ बत्रा ने कर्तज्ञता के साथ कहा|

धन्यवाद्! मुझे लगता है की मुझे यहाँ इसी के लिए बुलाया गया है|” अभी ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया|

“मुझे अश्वथामा के बारे में और बताओ|” डॉ बत्रा ने कहा|

अभी ने उत्तर दिया, “द्रोणाचार्य कोरवो और पांडवो के राजकीय गुरु थे| वो दिव्य ास्त्रो सहित उन्नत सैंन्य कलाओ में निपुण थे| अर्जुन उनके सबसे प्रिय शिष्य थे|”

“ये जानकार की परशुराम अपनी संपत्ति भरमानो को दे रहे थे, द्रोण उनके पास पहुंचे| दुर्भाग्य से परशुराम के पास केवल उनके शस्त्रास्त्र ही बचे थे| उन्होंने द्रोण को अस्त्रा देने और उन्हें कैसे उपयोग करना है, उसका ज्ञान देने का प्रस्ताव रखा| द्रोण ने सभी शस्त्रशस्त्र और ‘आचार्य’ की उपाधि प्राप्त की और वो द्रोणाचार्य कहलाये जाने लगे|”

“अभी, मैंने तुमसे अश्वथामा के बारे में पूछा था, न की किसी द्रोणाचार्य के बारे में|” डॉ बत्रा ने कहा|

इसके जवाब में भी ने कहा, “सर, ये जानने के लिए की अश्वथामा कोण है, द्रोणाचार्य के बारे में जानना आवश्यक है| भगवान् शिव जैसे प्रकर्मी पुत्र्र की प्राप्ति के लिए द्रोणाचारा ने कई वर्षो तक भगवन शिव की तपस्या की थी, जिससे उन्हें ‘द्रोणी’, यानि की अश्वथामा की प्राप्ति हुई|”

“अश्वथामा के पास भगवन शिव के जैसी वीरता थी| अश्वथामा एक शक्तिशाली योद्धा था, जिसने कोरवो की और से पांडवो की विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी| योध में केवल अश्वथामा और उसके मां कृपाचार्य ही जीवित बचे थे| अश्वथामा एक अजय योद्धा था, जिसे हतियारो के विज्ञान का गुरु मन जाता है| उसे 64 प्रकार की कलाओ और 18 विद्या और ज्ञान की शाखाओ में पूर्ण निपुणता प्राप्त थी| धार्मिक ग्रंथो में कहा गया है की वो अगले व्यास और सप्त ऋषियों में से एक होगा| अश्वथामा सात चिरंजीवनियो में से एक है|”

“अश्वथामा आपने माथे पर एक मणि के साथ पैदा हुआ था, जो उसे मनुष्य से निम्न जीवित प्राणियों पर एक विशेष शक्ति प्रदान करती थी| सहनशक्ति में वो पर्वत के सामान था और उसमे अग्नि की ऊर्जा थी| गंभीरता में वो समुन्द्र के सामान था और रोकश में सर्प विष के सामान|”

“मानी उसे प्रेतों, राक्षसों और विशेल कीड़ो एवं पशुओ से बचता थी| द्रोणाचार्य आपने पुत्र्र से बोहोत प्रेम करते थे|”

“द्रोणाचार्य और अश्वथामा हस्तिनापुर राज्य (कोरवो के पिता ध्रतराष्ट्र का राज्य) के प्रति निष्ठावान थे| अश्वथामा के पिता द्रोणाचार्य सभी योद्धाओ में सर्वश्रेष्ठ थे| भगवान् श्री कृष्णा को पता था की जब द्रोणाचार्य के हाथ में धनुष और बाण हो, तब उन्हें हराना असंभव था| श्री कृष्णा को ये भी पता था की द्रोणाचार्य आपने पुत्रा अश्वथामा से बहुत प्रेम करते थे, इसलिए उन्होंने युधिष्टर और अन्य पांडवो को ये सुझाव दिया की यदि वो उन्हें ये यकीं दिला दे की उनके पुत्र की योध क्षेत्र में मृत्यु हो गयी है तो द्रोणाचार्य दुखी हो जायेंगे और दुःख में आपने आप को निरस्त्र कर देंगे|”

“भगवन श्री कृष्णा ने ये सुझाव दिया की भीम ( पांडवो में से एक ) अश्वथामा नमक होती को मारकर द्रोणाचार्य के सामने ये दवा करेंगे की उन्होंने द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा को मार दिया है| हठी को मरने के बाद भीम ने जोर-जोर से यह घोषणा की की उन्होंने अश्वथामा को मार डाला है| किन्तु द्रोणाचार्य ने भीम के कथन पर भरोसा नहीं किया और वो युधिष्टर ( पांडवो में सबसे बड़े) के पास पहुंचे| द्रोणाचार्य को युधिष्टर के सत्य के प्रति दृढ निष्कए का पता था और वो जानते थे की वो कभी झूट नहीं बोलेंगे| द्रोणाचार्य युधिष्टर के पास पहुंचे और उन्होंने पूछा की क्या उनके पुत्र की मृत्यु हो चुकी है, उत्तर में युधिष्टर ने कहा, ‘ अश्वथामा की मृत्यु हो चूकी है; किन्तु वो एक हाथी था, आपका पुत्र नहीं|’ कृष्णा ये भी जानते थे की युधिष्टर के लिए झूट बोलना असंभव था| उनके आदेश पर आया यौद्धाओ ने तुरही और शंक बजाते हुए ईएसएस तरह से प्रसन्नता का शोर मचाया की द्रोणाचार्य को केवल इतना ही सुनाई दिया की ‘अश्वथामा की मृत्यु हो चुकी है’; वो युधिष्टर के उत्तर का दूसरा हिस्सा नहीं सुन पाए|”

“व्यथा से परिपूर्ण, आपने पुत्र को मारा हुआ मानते हुए द्रोणाचार्य आपने रथ से उठार गए, आपने अस्त्र- शास्त्र त्याग दिए और समाधी में बेथ गए| आपने नेत्रों को बाद कर उसकी आत्मा अश्वथामा की आत्मा की खोज में नक्षत्रीय यात्रा कर स्वर्ग में चली गयी| जब वो निहथे थे तो उन्हें मार दिया गया था| इस प्रकार, योध के आठवे दिन गुरु द्रोणाचार्य भगवन कृष्ण और पांडवो द्वारा इस्तेमाल किये गए अनुचित साधनो द्वारा मारे गए थे| इस घटना से अश्वथामा को गहरा झटका लगा और उन्होंने किसी भी मूल्य पर पांडवो के अध्याय को समाप्त करने का फैसला किया”

“कोरवो की हार के बाद योध की आखरी रात में अश्वथामा बहुत की बेचैन और परेशान एक पेड़ के निचे बैठा हुआ था|”

“एक उल्लू ने कोई के समूह से लड़ते हुए उसका धियान आकर्षित किया| इससे उसे पांडवो के शिविर पर रात में आक्रमण करने का विचार आया| कुछ जीवित योद्धाओ के साथ उसने रात को शिविर पर आक्रमण किया|”

अश्वथामा ने सम्पूर्ण पांडव शिविर जलाकर राखह कर दिया| कुछ भी नहीं बचा| वो आगे बढ़ा और पानवो की सेना के कई पमुख यौद्धाओ को भी मार डाला|”

“उसने पांडवो के पांचो पुत्रो को ये सोचकर की वो पांडव भाई है, सोते समय मार दिया| कहानी के कुछ संस्करणों में, ये जनता था की वो पांडव नहीं थे, लेकिन फिर भी उन्हें मार दिया, क्योकि वो उनके पिता को नहीं धुंध पाया| अश्वथामा का मन्नान था की उसके लिए अचानक पांडवो पर हमला करना उचित था, क्योकि उसके पिता की भी हत्या अन्यायपूर्ण ढंग से की गयी थी| हलाकि वो आपने प्रतिशोध को उचित मानता था, लेकिन उसे आपने ही पक्ष के लोगो ने चेतावनी दी थी की ऐसा नहीं है|”

“जब पांडव रात के बाद भगवन श्री कृष्णा के साथ शिविर में लोटे तो अश्वथामा के इस कृत्य पर क्रोधित श्री कृष्णा ने अश्वथामा को कलियुग के अंत तक अमरता और मृत जीवन का शाप दिया और अश्वथामा के मस्तक की मणि को ये कहते हुए ले लिया था की ‘ये घाव कभी नहीं भरेगा|’ ये थी अश्वथामा की कहानी|”

” ये कहानी अविश्वसनीय जैसी है, किन्तु फिर भी अश्वथामा की कथा पर हिन्दू धर्म के लोगो को विश्वास है| कहा जाता है की एक 5,000 वर्षीय व्यक्ति भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कुछ मंदिरो में रहते हुए पाया गया है| ज़ी-न्यूज़ की टीम ने लिलौटी नाथ मंदिर, शिवराजपुर मंदिर और खेरेश्वर मंदिर जैसे मंदिरो का डोरा किया है और हर जगह अश्वथामा की कथा मौजूद थी| समाचार चैनल के विशेषयज्ञ मंदिर के बंद दरवाजो के बहार पूरी रात आपने कमेरो के साथ रुके थे, ताकि पता चल सके की कौन अंदर आता है और द्वार खुलने से पहले मूर्तियों को फूल और जल चढ़ाता है| कोई नहीं आया; लेकिन सुबह-सुबह जब दरवाजे खुले गए तो उन्होंने पाया की बंद परिसर में प्रार्थना पहले ही की जा चुकी है, क्योकि वह जल और फूल बिखरे हुए थे|” ” ये कहानी अविश्वसनीय जैसी है, किन्तु फिर भी अश्वथामा की कथा पर हिन्दू धर्म के लोगो को विश्वास है| कहा जाता है की एक 5,000 वर्षीय व्यक्ति भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कुछ मंदिरो में रहते हुए पाया गया है| ज़ी – न्यूज़ की टीम ने लिलौटी नाथ मंदिर, शिवराजपुर मंदिर और खेरेश्वर मंदिर जैसे मंदिरो का डोरा किया है और हर जगह अश्वथामा की कथा मौजूद थी| समाचार चैनल के विशेषयज्ञ मंदिर के बंद दरवाजो के बहार पूरी रात आपने कमेरो के साथ रुके थे, ताकि पता चल सके की कोण अंदर आता है और द्वार खुलने से पहले मूर्तियों को फूल और जल चढ़ाता है| कोई नहीं आया; लेकिन सुबह-सुबह जब दरवाजे खुले गए तो उन्होंने पाया की बंद परिसर में प्रार्थना पहले ही की जा चुकी है, क्योकि वह जल और फूल बिखरे हुए थे|”

“स्थानीय लोगो का मानना है की ये 5,000 वर्षीय व्यक्ति वास्तव में महाकाव्य महाभारत का अश्वथामा है| प्रत्येक मंदिर में वो रोज प्रातः कल पूजा करता है और भगवन और उनकी मूर्तियों को जल अर्पण करता है| ये हर दिन होता है, जब मंदिर के दरवाजे बंद होते है| रिपोर्टर ने कहानी को सत्यापित करने के लिए कुछ डॉक्टरों, पुजारियों और स्थानीय निवासियों से भी बात की|”

“एक दशक से भी अधिक पुराने अख़बार के लेख में, जो छुट्टियों पर गए एक रेलवे के कर्मचारी के बारे में था, नवसारी (गुजरात) के जंगलो में भटकने के दौरान उसने लगभग 12 फ़ीट के एक बहुत लम्बे आदमी को देखा था, जिसके माथे पर एक घाव था| उसने उसके साथ बातचीत करने का दवा किया और ये जाना की भीम उससे कही अधिक लम्बा और मजबूत था|” अभी ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा|

” ये और कुछ नहीं, केवल कहानियां है| तुमने द्रोणाचार्य का दोनों बार वर्णन किया है…परशुराम और अश्वथामा?” डॉ बत्रा ने पूछा|

“हाँ, अश्वथामा द्रोणाचार्य के पुत्र थे और परशुराम द्रोणाचार्य के गुरु| माना जाता है की वो दोनों अलग-अलग युगो में थे, हज़ारो वर्षो के अंतर के साथ| दरअसल, एक कथा के अनुसार, भारत के भुराणपुर के पास स्तिथ एक गाओ है, झा असीरगढ़ नमक एक किला है| स्थानीय लोगो के अनुसार, अश्वथामा वह अभी भी आता हैi और हर सुबह किले में शिवलिंग पर फूल चढ़ाता है| कुछ आया लोगो ने अश्वथामा को हिमालय की तलहटी में जनजातियों के बीच रहते और घूमते देखने का दवा किया है|” अभी ने जवाब दिया|

“आइये, अब हम आपने सोने के कक्ष की और चलते है|” L.S.D. ने कहा|

वो तुरंत अपनी कुर्सी से कड़ी हो गयी| बाकि सब ने भी अपनी सीट साथ ही छोड़ दी और सुरक्षाकर्मियों द्वारा निर्देशित सभी अभी के पीछे चल दिए|

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