unexpectedstories.in अगला सेशन अब शुरू होने को था। जैसे ही सब व्यवस्थित हुए, शाइना ने पूछताछ फिर से शुरू की।
“इन सभी वर्षो के अलावा तुमने और कौंन सी भूमिकाएँ निभाई है ? ” वर्तमान आँखों का धोका है
स्क्रीन पर बहुत तेजी से बहुत सी जगहे, चेहरे व घटनाये बदलने लगी।
स्क्रीन पर ओम ने अलग – अलग प्रकार की पारंपरिक वेशभूषा पहनी हुई थी और स्क्रीन पर दिख रही जगह विभिन्न शताब्दी और युगो को दर्शा रही थी; परन्तु ओम का चेहरा जरा भी नहीं बदल रहा था।
जैसे ही उसने आपने सभी रूपों को याद किया- दर, अनिश्चितता, ख़ुशी, शांति, उत्तेजना, आश्चर्य, पश्चाताप के भाव उसके चेहरे पर प्रकट हुए और उसने अपनी आँखों को कसकर बंद कर लिया। unexpectedstories.in
जैसे ही कुछ दुःखद उसके मस्तिष्क से गुजरा, उसकी आँखें नम हो गय। उसने आपनी आँखें खोली, जो खून जैसी लाल हो रही थी। जैसे ही उसने ऐसा किया, स्क्रीन से छवियाँ गायब हो गई। वो बहुत दुःखी और डरा हुआ लग रहा था। जब उसे महसूस हुआ कि सब उसे ही देख रहे है, उसने आपने आप को नियंत्रित किया और एकदम शांत महसूस करने लगा।
यद्यपि वो इस तथ्य से बहुत ज्यादा विचलित था कि उसकी जिंदगी अजनबियों द्वारा एक चलचित्र के रूप में देखि जा रही थी और जल्द ही उनको रहस्य का पता चलने वाला था।
कमरे में सभी ने न पहचान सकने वाले द्रश्य स्क्रीन पर देखे थे; परन्तु तीन चेहरों को आसानी से समझा जा सकता था। पहला, बहुत ही सूंदर व सुरुचिपूर्ण स्पष्टतः एक महिला का था, जो ओम कि यादों में गहरायी में छपा हुआ था। वह चेहरा ओम कि सभी परेशानियों का आधार था। उसे प्रायः बिल्कुल अलग – अलग परिवेशों में भी देखा जा सकता है।
ओम और महिला के बीच एक विपरीत चिह्न यह था कि ओम कभी बूढ़ा नहीं दिखा; जबकि वो हर आयु, जैसे किशोरी, तरुणी, परिपकव महिला और वृद्ध स्त्री कि तरह दिखाई दी। महिला का जीवन – रहित शरीर तीन अलग – अलग युगो में, तीन अलग – अलग वेशभूषा में ओम के साथ दिखाई दिया। जब तीसरी बार वह मृत दिखाई दी, ओम ने उसी क्षण अपनी आँखें खोल दी थी।
दूसरा चेहरा, जो बार – बार सामने आ रहा था, वह एक मजबूत शरीर वाले व्यक्ति का था, जो बहुत सारे तीर व धनुष लिए हुए और एक कुल्हाड़ी जैसे शस्त्र, परशु- इसके अतिरिक्त कुछ प्राचीन विशाल शस्त्रों के साथ था।
तीसरा चेहरा फिर से एक मजबूत शरीर वाले व्यक्ति का था। उसके भाव भयंकर क्रोध वाले थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह बिना दर के हर प्रकार के युद्ध के लिए तत्पर था।
“यह कौंन है ?” एल एस डी ने पूछा।
“परशुराम और अश्वथामा, हमारे ग्रंथो के दो चिरंजीवी,” अभी ने बताया।
“दो ?” एल एस डी ने अविशवास के साथ कहा।
“हिन्दू पुराणों में सात चिरंजीवी व्यक्तियों का उल्लेख है। इन दो के अतिरिक्त पाँच और भी है। ” स्क्रीन पर देखते हुए अभी ने उत्तर दिया।
“वह कौंन है ?” एल एस डी ने पूछा।
स्क्रीन पर असम्बद्ध द्र्श्यो के बदलने कि शृंखला के चलते रहने के बावजूद, जिनका कोई मतलब नहीं बन रहा था, अभी ने एल एस डी से कहना जारी रखा और स्क्रीन पर कुछ अपनी बुद्धिमता से सम्बंधित और व्यावहारिक हल ढूंढ़ता रहा।
“बाकी चिरंजीवी है राजा बलि। भगवान विष्णु के वामन अवतार ने असुर राज महाबली के अहंकार के बाद उसका विनाश किया था, उसे पाताल लोक में रहने के लिए भेज दिया गया था, परंतु बलि को वर्ष में एक बार पृथ्वी पर आने की अनुमति दी गयी थी। वह दिन केरल में ‘ओणम ‘ के रूप में मनाया जाता है। “
“विभीषण, जो रावण के छोटे भाई थे। विभीषण ने भगवान श्री राम की सहायता की थी, जिन्होंने उन्हें अमरता का आशीर्वाद दिया था। राजस्थान के शहर कोटा में विभीषण को समर्पित एक मंदिर है। भारत में ऐसा केवल वही मंदिर है !”
“महाभारत के रचयिता वेदव्यास भी अमर है “
“कृपाचार्य, कोरवो और पांडवो के गुरु और अश्वथामा के मामा।”
“और अंत में, श्रीहनुमानजी, जो कलियुग में अपने भक्तो की रक्षा करते है। “
डॉ शाइना को छोड़कर सभी अपने सामने हो रही घटनाओ के खुलासे से हतप्रभ थे। सम्मोहन के अपने कार्यकाल में उन्होंने ओम से बहुत अधिक ऊँचे स्तर के विचलित मरीजों को देखा था, अतः उन्हें किसी चीज़ से भी अचरज नहीं हुआ।
उन्होंने अपना एक हाथ उसके हाथ पर सांत्वना देने के लिए रखा।
“ओम, इन वर्षो में सुषेण के अलावा तुम और किस रूप में रहे हो ? धीरे-धीरे एक के बाद दूसरा जवाब दो। अपना समय लो और शांत रहो। “
ओम ने शाइना की और देखा और दोबारा बोलने से पहले अपनी आँखें बंद कर ली।
सुविधा केंद्र से दूर, द्वीप के जंगल में अत्याधुनिक मुखौटे से झाँकती दो आँखें किसी चीज़ पर ऐसे गड़ी हुई थी, जैसे चील अपने शिकार को देखती है और कुछ घटित होने की प्रतीक्षा कर रही थी। व्यक्ति के पास आधुनिक अस्त्र और उच्च तकनिकी उपकरण थे।
दूर स्थित कमरे में दो वृद्ध आँखें सफ़ेद स्क्रीन को घूर रही थी, जिस पर सुविधा केंद्र के अंदर प्रयोगशाला का द्रश्य दिख रहा था, जहाँ टीम के सभी सदस्य और ओम बैठे हुए थे। आदमी के हाथ में रुद्राक्ष की माला थी। उसने एक सेल्युलर फ़ोन उठाया और अपनी आँखें स्क्रीन पर गड़ाए हुए रीडायल का बटन दबाया। उसने कुछ क्षण प्रतीक्षा की, फिर देखा की डॉ निवासन ने फ़ोन उठाकर सर हिलाया और धैर्य के साथ कहा, “जी, सर। “
पूछताछ कक्ष में स्क्रीन पर सर से पैर तक सोने से सजा, सेवक व सेविकाओं से घिरा महल में एक आदमी दिख रहा था। उसके पास ओम का चेहरा था। महल शाही व आभिजात्य था। स्क्रीन पर तस्वीरें आ- जा रही थी और वही ओम कुछ बड़बड़ा रहा था।
वह कह रहा था, “मैंने जिंदगी के सब रंग देखे है। में धनवान और प्रख्यात रहा हु, जब लोग मेरी सेवा और मेरा सम्मान करने के लिए लालायित रहते थे; और इसके विपरीत, में अत्यंत दरिद्रता में भी रहा हु। “
द्रश्य में अब ओम ठंड में काँपते हुए दिख रहा था और उसके शरीर पर नाम मात्र के वस्त्र थे। आधारिक संरचना से ये दिख रहा था की निस्संदेह दोनों द्रश्यो में एक सदी के समय का अंतराल था।
“मै एक सम्राट रहा हूँ। मै एक गुलाम रहा हूँ। ” स्क्रीन पर तस्वीरें ओम के वे सभी रूप दिखा रही थी।
इसके बाद ओम द्वीप के जंगल में अकेला, बहुत भयभीत और बेखबर-सा दिखाई दिया।
“मैं बुरी तरह डरा हुआ और पूर्णतया अकेले रहा हूँ। मैं अति प्रियतम व्यक्ति रहा हूँ। मैं बहुत बहादुर और एक भीषण योद्धा भी रहा हूँ। “
अब ओम को एक बच्चे के साथ देखा जा सकता था। उसकी गोद में विकलांग और बुरी तरह डरा हुआ और बगल में वही आकर्षक महिला भी थी। वह तस्वीर मानो अनंत काल के लिए स्थिर हो गयी हो ! तब ओम ने अपनी आँखें खोली, जो गीली हो गयी थी। एक आँसू बिना किसी बाधा के उसके गाल पर से लुढ़क गया। ओम ने जिस प्रथम व्यक्ति को देखा, वे शाइना थी। वे भी हिल गयी थी, परंतु कुछ नहीं बोली।
ओम स्थिर व शांत हो गया और फिर से कम भावनात्मक और अधिक व्यावहारिक होकर उसने कहा, “मैं गोविंदलाल यादव और प्रोतिम दास और बी सी चक्रवर्ती रह चुका हूँ। मैं वेंकट रमन्ना राव रहा हूँ और बाद में माधवराव के नाम से सव्य के बेटे की तरह रह चुका हूँ। मैं गुरशील सिंह और एस पी रेडडी रह चुका हूँ । अधीरैंयन भी मेरी बहुत सी पहचानो में से एक है।” उसके ये सब कहते समय स्क्रीन खाली ही थी।
अभी शाइना की ओर झुका और कहा, “उससे विष्णु गुप्त के बारे में और पूछिए।”
शाइना ने डॉ निवासन की और देखा, जिन्होंने एक मोंन सहमति दी।।
“तुमने इतने नाम लिए, परंतु वे हमारे पास पहले से ही है। वे सब सरकारी रिकॉर्ड में है। पर तुमने एक नाम का जिक्र नहीं किया- विष्णु गुप्त।” डॉ शाइना ने प्रशन किया।
एक धुंधली-सी तस्वीर स्क्रीन पर छा गयी, जो हर बार गायब हो जाती थी।
जो ओम अब दिखाई दे रहा था, वह गंजे के रूप में, ब्राह्मण की विशिष्ट शिखा के साथ दिखा। आदमी के माथे पर भगवान विष्णु का ‘U’ चिन्ह दिखाई दिया, जिसने सफ़ेद उत्तरीय व धोती पहन रखी थी।
ओम ने कहना शुरू किया, “मैं चन्द्रगुप्त मौर्य का मुख्य सलाहकार था। मैं उनकी समिति के सबसे महत्वपुर्ण सदस्यो में से एक होने के साथ उनका अच्छा मित्र भी था। मैं हमारे युद्ध संबंधी विषयो के अतिरिक्त उन्हें राजनितिक व व्यक्तिगत सलाह देता था। मुझे ‘चाणक्य’ के नाम से भी जाना जाता था।”
जैसे ही ओम ने यह कहा, स्क्रीन पर तस्वीर इतनी स्पष्ट हो गयी की उन सबको बिना किसी संदेह के यह अहसास हो गया की वह चाणक्य ही है।
ओम के बोलते हुए प्रेम कुछ गणना कर रहा था। जैसे ही उसने समाप्त किया, कागज पर शीर्षक था- ‘सुषेण व चाणक्य के मध्य समय अंतराल और चाणक्य युग से वर्तमान का समय’।
डॉ. बत्रा थोड़ी देर उस पर ध्यान देने के बाद बोले, “यही तो मैं कह रहा हूँ- असंभव, अविश्वसनीय ! ” फिर वे उठे और उन्होंने डॉ निवासन को कागज दिया।
डॉ. निवासन ने ध्यान से कागज को देखा, जिस पर ठीक से समझ में न आने वाली लिखावट में कुछ लिखा हुआ था-
सुषेण- 7292 ईसा पूर्व में, चाणक्य- 321 ईसा पूर्व में
समय अंतराल-6971 वर्ष
चाणक्य-३२१ ईसा पूर्व में, वर्तमान दिवस-2020
समय अंतराल-2341 वर्ष
सुषेण-7292 ईसा पूर्व में, वर्तमान दिवस – 2020
कुल समय अंतराल-9312 वर्ष।
वे किसी तरह समझ गए और लंबी साँसे लेते हुए खड़े हुए।
“पूछताछ जारी रखो। मेरी प्रतीक्षा मत करना। ” वे शाइना की तरफ देखते हुए बोले।
इस दौरान एल एस डी नक़्शे में, अपने गैजेट्स की सहायता से, स्थानों के संभव प्राचीन कोड के द्वारा सभी दिशाओ में नक़्शे को चारो और घूमकर कुछ अर्थ खोजने में लगी हुई थी। उसकी उत्सुकता और हाव भाव से यह स्पष्ट था की वह नक़्शे में रेखांकित स्थानों का पता लगाने से केवल एक कदम ही दूर थी । यह टीम के लिए एक और बड़ी वास्तविक खोज साबित होने वाली थी।
उधर द्वीप के जंगल में, आदमी ने अपने बास्ते में से एक उपकरण निकला और उसे चार भागो में विभाजित कर दिया। चारो अलग-अलग उपकरणों को जमीन पर खुला छोड़ने के बाद वे निकट की इमारत के चारो कोनो के पास चार अलग-अलग दिशाओ में फैल गए। आदमी ने आपने टैबलेट पर एक बटन दबाया और इमारत की उठी आकृति उसके टैबलेट पर दिखाई दी। छवि को इधर-उधर चलते हुए लाल बिन्दुओ द्वारा, जो लोगो को दर्शा रहे थे , बाधित किया जा रहा था। आदमी अब संस्थान में प्रवेश करने और बहार आने वाली प्रत्येक व्यक्ति पर नज़र रख सकता था।
डॉ निवासन एक कागज का टुकड़ा लिये, जिस पर ओम के पुरे जीवन काल के कुछ हिस्सों का वर्णन था, परेशान व अस्त-व्यस्त-से गलियारे में घूम रहे थे। वे जल्द ही एक भारी काँच के दरवाजे के एकदम सीध में खड़े हुए और अपनी आई डी दिखाई, दरवाज़ा सरकते हुए खुला और उन्हें अंदर जाने दिया।
थोड़ी देर बाद उन्होंने अपने आप को एक अन्य दरवाजे के सामने पाया, जिसकी सुरक्षा दो सुरक्षाकर्मी कर रहे थे। डॉ निवासन के रेटिना जाँच के बाद ही दरवाजा खुला। दरवाजे दोनों और सरकते हुए बीच में से खुले और उन्हें अंदर जाने दिया।
परिक्षण कक्ष के अंदर डॉ शाइना कह रही थी, “तुमने जो कुछ भी बताया, क्या तुम्हे उसका मतलब भी पता है ? तुम हमे यह विशवास दिलाने का प्रयास कर रहे हो की तुम जिन्दा थे।…”
ओम ने उन्हें बीच में रोका।
“त्रेता युग में। “
“और तुम चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भी जीवित थे?”
“मैं अब कलियुग में भी जिंदा हूँ और किसी को भी कोई विशवास दिलाने का प्रयास नहीं कर रहा हूँ। “
डॉ. शाइना ने गहरी साँस ली और धैर्य के साथ जवाब दिया, “ओम, इन सब वर्षो की अवधि का जोड़ हजारो वर्ष है। तुम हमे विशवास दिलाना चाहते हो कि तुम रामायण और महाभारत के समय से जीवित हो?”
“मैं सतयुग से जीवित हूँ। त्रेता युग और द्वापर युग से होते हुए अब मैं कलियुग में आपके सामने हूँ। ” ओम ने एक दिव्य मुस्कान के साथ जवाब दिया।
अभी पुरे समय ओम को बहुत ध्यान से सुन रहा था। उसने टोका, “द्वापर युग में तुम कौंन थे?”
ओम ने आँखें बंद करने से पहले उसकी तरफ, फिर वापस शाइना कि और देखा और कहा, “मेरे इतिहास में बहुत से नाम थे, परंतु इन सब में द्वापर युग से संबंधित विधुर था। “
स्क्रीन पर तस्वीर इसका सबूत दे रही थी कि ओम के शब्द सरलता से कहे गए तथ्य है। ये ओम एक कीमती वेश और छाती तक लटकते हुए स्वर्ण आभूषणों से सजा दिखाई दिया। उसके सिर पर एक स्वर्णिम मुकुट था, जो उसके ऐष्वर्य को और बड़ा रहा था।
वह एक आदमी के बराबर में खड़ा था, जो नेत्रहीन प्रतीत हो रहा था, जो राजा के सिंहासन पर, आँखों पर पटटी बाँधी औरत- अनुमानतः रानी-के बराबर में बैठा दिख रहा था। अंधा राजा और आँखों पर पटटी बाँधी रानी राजा धृतराष्ट्र और उनकी पत्नी गांधारी थे; जो कोरवो के माता-पिता थे।
“विधुर ! राजा धृतराष्ट्र के सौतेले भाई ! ” अभी ने तेजी से कह। अभी ने सम्मान के साथ सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर विनम्रता से पूछा, “इसका मतलब, आप वास्तव में भगवान श्रीकृष्ण से मिले है ? क्या वे द्वापर युग में वास्तव में आपके घर में ठहरे थे ? “
ओम के कुछ प्रतिक्रिया देने से पहले ही डॉ. शाइना ने पूछा-
“तुम कब से जीवित हो ? तुम्हे जो कुछ भी याद है और तुम जिन परिस्थितियों से गुजरे हो, हमे सब बताओ। “
ओम ने एक गहरी साँस ली और शाइना ने इसमें उसकी असहायता को महसूस किया। वह जनता था कि वह फँसा हुआ है और इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था, अतः उसने शुरू किया।
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