अध्याय:-8 रहस्यमय बक्सा

unexpectedstories.in वो आंधी वाली रात थी| अँधेरे गलियारे में चलते समय रौशनी का एकमात्र स्त्रोत गलियारे के आखिरी छोर पर झूलता हुआ लैंप था|

L.S.D., ने शाइना को ‘गुड नाईट’ कहा और अपने कमरे में जाते ही जूते उतारने लगी| उसका कमरा काफी बड़ा था, पर उसमे से सीलन की गंध आ रही थी| हालाँकि, वह पुराने फर्नीचर और लैम्प्स से सुस्सजित था, पर ऐसा लग रहा था, जैसे की उसका लम्बे समय से उपयोग नहीं किया गया था|

अगले कमरे में शाइना अपने बच्चों के बारे में चिंतित थी| वह कुर्सी पर बैठ गयी और अधलेटी सी छत्त को देखने लगी, जबकि बाकी लोग अपने-अपने कमरों में व्यवस्तिथ हो रहे थे|

डॉ शाइना की आँखें नींद से भारी हो रही थी और जल्दी ही वो सो गयी| देर रात डॉ शाइना तेजी से उठी, जब उन्होंने दरवाजे के बहार किसी की परछाई को देखा और महसूस किया, जैसे कोई बहार चहलकदमी कर रहा हो| वह तेजी से उठी और दरवाजे खोलकर बहार देखने लगी| डॉ शाइना अँधेरे गलियारे के आखिरी छोर तक गयी और देखा की वहां कोई नहीं था| उन्हें एकमात्र तेज हवा की सनसनाती आवाज़ सुनाई दी| वो पीछे मुड़ी और अचानक L.S.D., को अपने पीछे खड़े देखा| डॉ शाइना डर से चींखी, “तुम यहां क्या कर रही हो?” unexpectedstories.in

L.S.D., लम्बी सांस लेते हुए बोली, “मुझे अकेले डर लग रहा था| मैं आपके साथ रहना चाहती हूँ| क्या मैं आपके कमरे में सो सकती हूँ?” डॉ शाइना ने अपना पसीना पोछते हुए सहमति में सर हिलाया|

वो दोनों कमरे में अंदर गयी| L.S.D., ने बैग दीवान पर रखा और उसे खोलना शुरू कर दिया|

डॉ शाइना ने पूछा, “क्या तुमने किसी के चलने की आवाज़ सुनी?”

परछाई देखी

L.S.D., ने डरते हुए जवाब दिया, “हाँ, मैंने अपनी खिड़की से किसी की परछाई देखी, पर अँधेरे और हैडफ़ोन होने के कारण कुछ सुना नहीं| अच्छा है की मैं कुछ नहीं सुन पायी|”

वो मजाक करते हुए बोली, “मैं कोई भूत देखना या सुन्ना नहीं चाहती| मुझे पुरानी जगह ठीक नहीं लगती| यह हमेशा भुता होती है|”

डॉ शाइना ने पानी का गिलास रखा और L.S.D., को आश्वस्त करते हुए उसके विपरीत बोली, “भूत जैसी कोई चीज़ नहीं होती|”

L.S.D., ने उत्सुकता से पूछा, “मुझे समझ नहीं आया की आप बहार क्या कर रही थी?”

डॉ शाइना डरावनी परछाई की कहानी जातक गयी, क्योंकि L.S.D., पहले ही डरी हुई थी| वो अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली, “मैं अपने परिवार के लिए चिंतित हूँ| मै उनसे बात करना चाहती हूँ, पर अब काफी देर हो गयी है|”

L.S.D., ने डॉ शाइना को सांत्वना देने की कोशिश की, “चिंता न करे, मुझे विशवास है की आपका परिवार ठीक होगा और हम जल्द ही यहां से चलेंगे|” वो अपनी उंगलियां क्रॉस करती हुई बोली|

डॉ शाइना ने गहरी सांस ली और अपने बिस्तर की ओर चली गयी|

L.S.D., ने फिर अपना चश्मा उठाया, स्क्रीन खोली और कमरे की शांति को लैपटॉप के बटन दबाने की आवाज़ से भांग कर दिया|

इसी बीच, वीर ने अपने दो आदमियों के साथ, बक्से को लेने हेतु, रात के अन्धकार में स्पीड बोट से पोर्ट ब्लेयर तक की| कुछ दुरी से दो आँखें उसे बक्सा लेते और संभालते हुए देख राखी थी| जब वीर रॉयस दीप के लिए वहां से निकलना तो एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसका पीछा किया जा रहा था|

रात गुज़र गयी|

दरवाजे पर खटकने की आवाज़ से शाइना की नींद टूट गयी| उन्होंने कमरे में एक लिफाफा पाया। लिफाफा खोलते ही उन्होंने L.S.D., को जगाया| लिफ़ाफ़े में उनके सेशन के समय का विवरण था| बहार बहुत उजाला था|

नाश्ते के बाद शाइना और डॉ बत्रा डॉ निवासन के कक्ष की ओर गए, जबकि बाकी सभी पूछताछ वाले कमरे की ओर|

इस दौरान वीर भी डॉ निवासन के कमरे में गया और उन्हें देखने लगा| वो दो बंदूकधारियों के साथ अपने हाथो में दो बक्से लिए उनकी और बढ़ा| वो ओम के लाकर थे|

“इन्हे यही खोलो|” डॉ निवासन ने वीर को आदेश दिया|

डॉ शाइना और डॉ बत्रा वहां कुछ विचार-विमर्श के लिए थे, अन्यथा वो भी उसमे शामिल हो गए|

जैसे ही उनके सामने बक्से खुले, वो सब आश्चर्यचकित रह गए| बक्सों में इतिहास को अपने सवरूप में दर्ज होने से पूर्व के लिखे गए अभिलेख थे| किसी दुरुस्त भूमि पर सुरक्षित वो लेख ज़्यदातर संस्कृत में लिखे गए थे और कुछ हिंदी और प्रकारत में (पाली और संस्कृत का मिश्रण)|

वो आज के दिखने वाले कागज़ नहीं थे| वो ताम्बे के पत्र थे| प्रत्येक पत्र पर शीर्ष के रूप में नाम अंकित था| वो ओम द्वारा किये गए उसके नाम थे|

एक पुरानी खरल भी बक्से से निकली| इसके अतिरिक्त, कुछ बड़ी और भारी अंगूठियां, जो आज कल न ही प्रयोग में और न ही देखने में आती है|

विभिन्न शासनकाल में व्यापार हेतु प्रयोग किये गए प्राचीन और दुर्लभ सिक्के और देवनागरी में लिख गए पत्र, यहां तक की उर्दू में भी लिखे हुए, दिखाई दिए|

“सर, लॉकर में मुझे एक छोटी सुचना और मिली है, जिसे मैंने आपको सीधे देने के लिए सुरक्षित रखा है|” वीर ने बताया|

“सर, यह एक नक्शा है, जिसके साथ कुछ धातु के टुकड़े, परे की बोतल और एक पुस्तक है|”

पुस्तक पत्तो और सफ़ेद कपडे से बंधी थी, जिस पर खून के निशाँ थे| पुस्तक पर धातु की जिल्द थी, जिस पर कुछ अंकित था| डॉ बत्रा ने पुस्तक को अपने हाथ में लिया और बीच में से पन्ने पलटने लगे| उनकी आँखें पुस्तक में कुछ चित्र देखते ही आश्चर्य से बड़ी हो गयी| वो ऐसे ही पन्ने पलटते रहे, जैसे कुछ खोज कर रहे हो| वो पलटते और उन्होंने डॉ निवासन की ओर देखा, जिन्होंने अपना हाथ एक संकेत की तरह आगे बढ़ा दिया| डॉ बत्रा अभी पन्नो को और देखना चाहते थे, परन्तु उन्होंने पुस्तक डॉ निवासन की ओर बढ़ा दी|

“यदि आपका काम हो गया हो तो क्या हम आगे बढे?” डॉ निवासन ने तेज के लहजे में कहा|

डॉ बत्रा ने धातु के टुकड़े और नक़्शे को देखा| डॉ निवासन ने कहा, “हाँ, यह एक नक्शा है, पर किस प्रकार का?”

“उत्तर तो यही बैठा है कमरे के अंदर| चलो, उससे सीधे पूछते है|” शाइना ने सुझाव दिया|

“नहीं, अभी नहीं| उसे पता नहीं लगना चाहिए की यह सब हमारे कब्जे में है| पहले उससे पूछे जाने वाले प्रश्नो की सूचि तैयार करो|” डॉ निवासन ने आदेश दिया|

“ठीक है सर|” शाइना ने जवाब दिया|

“L.S.D., को मेरे पास भेजो| वीर, तुम उनके साथ रहो| शाइना, जब तक मैं वापिस नहीं आता, शुरू मत करना|” डॉ निवासन ने कहा|

वो सहमति से सर हिलाकर चले गए और डॉ निवासन L.S.D., की प्रतीक्षा करते रहे|

डॉ बत्रा ने लगभग भागते हुए कमरे में प्रवेश किया| उन्होंने ओम की तरफ उलझन भरे क्रोध की दृष्टि से देखा और अपने स्थान पर वापिस जाकर कंप्यूटर पर काम करने लगे| शाइना डॉ बत्रा के पास गयी और ये पाया के वो बहुत उत्तेजित थे| वो उत्सुकता के साथ कंप्यूटर पर कुछ खोज कर रहे थे|

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए पूछा, “तेज, आप क्यकर रहे है?”

डॉ बत्रा बिना स्क्रीन से नज़र हटाए अपना काम करते रहे|

“आप ठीक तो है? देखो, हम सब भी उतने ही हैरान और आश्चर्य….”

“श…” डॉ बत्रा ने हाथ से शाइना को चुप रहने का इशारा किया और अपना काम करते रहे|

शाइना को बुरा लगा, पर फिर भी, वो कुछ देर उनके पास खड़ी रही और फिर वहां से जाने के लिए पलटी| डॉ बत्रा ने उन्हें वापिस बुलाया|

“शाइना!”

वो फिर से पलट कर वापिस आयी| उनकी आँखें स्क्रीन पर ही थी|

“यह देखो|” डॉ बत्रा ने स्क्रीन को उनकी तरफ सरकाया|

“यह क्या है?”

डॉ बत्रा ने उन्हें समझाना शुरू किया-

“हमारे शरीर को प्रत्येक कोशिका में छोटे-छोटे इंजन होते है, जिन्हे ‘माइटोकांड्रिया’ कहा जाता है, जो हमे हमारी जरुरत के अनुसार ऊर्जा देते है| जब ये इंजन जीर्ण होने लगते है तो हमारा शरीर श्रीं और बूढ़ा होने लगता है|”

” तेज, आपका क्या मतलब है?”

“मतलब यह है की यदि ये माइटोकांड्रिया पुनर्नवा होने लगे तो शरीर एक औसत मनुष्य से ज़्यादा लम्बे समय तक जी सकता है|” डॉ बत्रा ने समझाया|

“तो आप ये कहना चाहते है की ओम के शरीर में यह छोटे इंजन कभी नहीं मरे?” डॉ शाइना ने विचार स्पष्ट करने का प्रयास किया|

तेज ने दूसरी तरफ से बात को समझने की कोशिश की, “वैज्ञानिको ने आज खमीर की आयु सामन्यतः 6 दिन की होती है, उसे 10 हफ्तों तक बढ़ाने का एक तरीका निकाला है|”

“और इसका हमसे क्या सम्बन्ध है?” शाइना परेशां थी|

“शाइना, यह 10 हफ्ते मनुष्य जीवन के 800 वर्ष के अनुरूप है| जब 2 जीन R.A.S., 2 और S.C.H., को D.N.A., से निकाल दिया जाता है तो इसके परिणामस्वरूप खमीर का आयुष्य बढ़ जाता है| यही जीन जब चूहे से निकाले जाते है तो उसकी आयु दोगुनी हो जाती है|” डॉ तेज ने आगे कहा|

“तो?” डॉ शाइना ने परेशां किया|

“मनुष्य शरीर में आयु बढ़ाने वाले विभिन्न प्रकार के जीन्स खोजे जा चुके है| मेरी चिंता ये है की विज्ञान को हम मनुष्यो के बारे में यह दवा करने से पहले एक लम्बा रास्ता तय करना है और मेरी चिंता ओम के दावे के विपरीत है|”

“क्या आप उसे अभी भी भ्रामक समझ रहे है?” शाइना ने पूछा और थोड़ा रुक कर बोली, “देखो तेज उस पर विश्वास न करने के लिए मेरे पास बहुत से कारण है, पर उसकी विश्सनीयता पर सवाल न उठाने के हज़ारो कारण भी है|”

“मुझे उसके खून का नमूना चाहिए|” डॉ बत्रा ने दृढ़ता से कहा|

शाइना ने असहमति से सर हिलाया, “डॉ निवासन आपको ऐसा करने की अनुमति अभी नहीं देंगे|”

इसी बीच डॉ निवासन L.S.D., से अपने कक्ष में बात कर रहे थे|

उन्होंने उसके सामने एक नक्शा फैलाया और पूछा, “क्या तुम ये साबित कर सकती हो की निसंदेह तुम सर्वश्रेष्ठ हो? तुम्हारे पास इस पहेली को सुलझाने के लिए 6 घंटे है, जो की इस नक़्शे की जगह ढूँढना है तथा वो हमे आगे कहा लजायेगी, ये बताना है|”

L.S.D. को चुनौतियां पसंद थी| वो उन्हें खुले मन से स्वीकार करती थी, क्योकि वो उसे उसकी क्षमताओं को जांचने और सुधरने का अवसर देती थी और स्वय पर और अधिक गौरवान्वित बताती थी| उसकी आँखें उत्साह से चमक उठी| उसने नक्शा लिया और मुड़ते हुए बहार चली गयी| डॉ निवासन ने दबी आवाज़ में कहा, “से हमारे बीच ही रखना L.S.D. किसी और से एक भी शब्द नहीं कहना| तुम्हारा समय शुरू होता है…अब!

थोड़ी देर बाद डॉ निवासन ने पूछताछ वाले कक्ष में प्रवेश किया|

Follow me on my social media accounts:-

Youtube:-https://www.youtube.com/@hemantsalwan4557

Instagram:-https://www.instagram.com/hemantsalwan2/?igsh=MWg1amtpOWt4ZGYybA%3D%3D#

Facebook-https://www.facebook.com/hemant.salwan.1/

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top