unexpectedstories.in यह गर्मियों के उन दुर्लभ दिनों में से एक था जब सूर्य का प्रकाश अपने अधिकतम सत्तर पर नहीं था नीला आसमान और सुबह की हवा तरोताज़ा कर देने वाली थी केवल एक हेलीकाप्टर की आवाज़ उस शान्तिमये वातावरण को भंग करने के लिए काफी थी इस उत्तम नज़ारे के बीच हेलीकाप्टर में एक आदमी बेहोश और बेखबर लेटा हुआ था चार अंगरक्षक उस पर ऐसे आँखें गड़ाए बैठे थे मानो अन्नंत काल से उसकी ऑंखें खुलने की प्रतीक्षा कर रहे हो उस आदमी का चेहरा सफ़ेद (Unexpectedstories.in) रंग से पूता हुआ था और उसकी दाढ़ी मूछे असामान्य रूप से बढ़ी हुई थी उसके लम्बे काले वे बिखरे हुए बाल भी उसे और रहस्यमय बना रहे थे 40 की उम्र के लिए वह काफी जवान प्रतीत हो रहा था उसका चेहरा तराशा हुआ और उसकी त्वचा आकर्षक व चमकदार थी जिसने उसके चारो और एक सुंदरता की आभा बनायीं हुई थी उसका शरीर हवा में रख के कण छोड़ता जाता उसकी बेहोशी उसके आस पास के लोगो को यह सोचने से नहीं रोक रही थी की वह कौन है ? जो भी उसे देखता वह जिज्ञासु और मोहित हो उठता |
डिजिटल आँखें :
पायलट ने घोषणा की 11.6754 डिग्री वेस्ट 94.5843 डिग्री नार्थ 3 मिनट में रोज़ द्वीप पर लैंडिंग करेगी रोज़ द्वीप अंडमान द्वीप समूह का सबसे सूंदर द्वीप है यह पोर्ट ब्लेयर से 2 किलो मीटर नार्थ दिशा में है | यह जगह दुर्लभ और आवश्यक प्रजातियों की विरासत के साथ साथ प्रकृति सबसे बेहतरीन तौफे – ‘शांति’ में इंसान को खींच लाती है द्वीप की सुंदरता के बीच एक गुम्बद के आकार का उच्च तकीनकी सुविधा केंद्र था विशुद्ध रूप से अनुसन्धान के उद्देश्य के लिए पृथक भूमि पर बनाया हुआ शानदार साम्राज्य वैभवशाली लड़को को भी प्रभावित कर देता था लेटेस्ट और आधुनिक तकनीक से लेस्स यह सुविधा केंद्र अत्याधुनिक तटीय और समुंद्री निगरानी प्रणाली का दावा करता था इसकी रचना और निर्माण केवल शीशे से किया गया है इस सुविधा केंद्र ने सतह प्रोद्योगिक का उत्तम इस्तेमाल किया था प्रत्येक स्क्रीन हाथ लगाते ही ऐसे बात करना शुरू कर देती है जैसे उन्नत प्रजाति का हिस्सा हो तापमान में और चारो ओर के वायुमंडलीय दबाव में बदलाव लाना जीवन को अकल्पनीय रूप से आसान बना रहा है इन पहलुओ में यह जितना शानदार था उसे भी अधिक यह सुरक्षा के लिहाज़ से प्रभावशाली था धनुष के आकर की छत्त के हार एक कौन में गति संवेदक कैमरा लगाए गए थे गुम्बद के अंदर कोई भी अकेला नहीं था जो जहा भी जाता वहाँ एक डिजिटल आँखें साथ जाती |
हालाँकि, वीर एक स्वेछिक सेवानवृत्त भारतीय सेना का पूर्व ब्रिगेडियर अपना कक्ष छोड़ सीधे गुम्बद के प्रवेश कक्ष की और गया प्रवेश करते ही उनसे चार हथियार बॉडीगॉर्ड से घिरे कैदी को देखा वह चारो उसके हथकड़ी लगे और आँख पर पट्टी बंधे बेसुध शरीर को ब्राम्बे में से खींचते हुए ला रहे थे उसके राख में साणे नंगे पैर फर्श पर एक रास्ता सा बनाते जा रहे थे |
वीर ने सोचा यही वही आदमी है शायद | unexpectedstories.in
कैदी ने बहुत कम कपडे पहने हुए थे सिर्फ एक छोटा और पतला सा लंगोट पहना हुआ था उसके पूरे शरीर पर भस्म लगी हुई थी और उसने अपने गले में एक रुद्राक्ष की माला पहनी हुई थी उसके गंदे और उलझे हुए बालों का आधा बना हुआ था ऐसा लग रहा था जैसे उसके बालों में जंग लगा हो वीर इस जगह 21 लोगों के साथ एक सिक्योरिटी शेफ के रूप में आया था जिसमे बंदूकधारी और गॉर्डस भी शामिल थे वह एक जरुरी काम के लिए गया था अपने धरम में सबसे बेहतरीन आदमी होने की वजह से दुनिया भर के अलग अलग संगठन गुप्त और सामाजिक अभियानों के लिए बुलाते थे पर यह अभियान उन सबसे अलग था |
इसके अलावा, वीर लगभग 6 फ़ीट लम्बा था उसने अपने जीवन में pichle 40 साल में अच्छा जीवन व्यतीत किया था जिसका पर्याप्त हिस्सा उसने आर्मी को सम्पर्पित किया था उसकी शकल एक मामूली आदमी की तरह ही थी कोई ख़ास बात नहीं थी उसका रंग सांवला और रंगरूटों जैसा बालो का कट उसके स्वभाव को और कठोर बना देता था उसके दोनों हाथो पर ताजे जख्मो के निशान उसके द्वारा लड़ी गयी लड़ाइयों की गंभीरता को प्राप्त करते थे उसका सख्त और गठीला शरीर उसकी काली जीन्स सफ़ेद टी-शर्ट और भूरे रंग की चमड़े की जैकेट के नीचे काफी साफ़ दिखाई दे रहा था उसकी आँखें काले एविएटर चश्मे से ढकी हुई थी वह हमेशा अपनी गन जो उसकी कमर पर जैकेट से ढकी रहती थी उसके बारे में हर परिस्थिति में सचेत रहता था |
वीर ने एक गॉर्ड को उस आदमी की आँखों पर से पट्टी हटाने और उसके हाथ खोलने को कहा उसने अपना चश्मा उतरा और तब उसकी दायीं आँख के नीचे एक निशाँ दिखाई दिया वीर की गहरी काली आँखें उस आदमी पर टिकी हुई थी और वह कुछ देर के लिए हैरान खड़ा रहा |
वीर और उसका बॉस उस आदमी का इंतज़ार कर रहे थे हालाँकि वह ठीक से नहीं जनता था की क्यों ? वह बस यह जनता था की जिस आदमी को वह खोज रहे थे वह मिल गया था और उससे पूछताछ की जानी थी हालाँकि वह यह भी नहीं जानता था की किस बारे में ? पर उसे यह सुनिश्चित था की जरूर कुछ गंभीर बात है उसकी बेसब्री अपने चरम पर थी क्योंकि वह पूरी कहानी जानना चाहता था वह सबसे गुप्त और अंतराल चक्र में खड़ा होने योग्य था यदि नहीं तो उसे बुलाया ही क्यों गया था ?
उसने सबसे प्रभावशाली इंसान के साथ काम किया था और उसके तरीको को अच्छे से जानता था लेकिन उसके ये नए उच्च अधिकारी अजीब थे वह इस सबके बारे में बहुत परेशां थे फिर भी सब कुछ एक बड़ा सीक्रेट रखने में कामियाब रहे | (Unexpectedstories.in)
वीर! प्रवेश कक्ष से एक जानी पहचानी आवाज़ में अपना नाम सुनके वीर चौंक गया | वह आवाज़ डॉ। निवासन, उसके बॉस की थी।
” जी सर। ” उसने अत्तर दिया |
जिस आदमी को वीर ने उत्तर दिया वह 4 फ़ीट 8 इंच लम्बे, 65 साल के आदमी थे और उनका रंग कला था उनके होंठ डार्क ब्राउन थे जिससे पता चलता था की वह धूम्रपान बहुत करते थे। उनके सिर्फ सर के आगे हिस्से में कुछ सफ़ेद बाल थे एक और पहलु जो उनकी उम्र को दर्शाता था वह ये की उनका बेमेल और नीरस पहनावा। डॉ। निवासन ने सफ़ेद शर्ट के ऊपर भूरा रंग का मेट सूट पहना था और उनके रंग से लाल रंग की चौड़ी टाई लटकी हुई थी उन्होंने अपनी आँखों पर एक अप्रचलित काले चकोर आकर का चश्मा भी पहना था उनके गले में एक फीता पड़ा हुआ था जिसके किनारे उनके चश्मे से बंधे हुए थे।
डॉ निवासन की वेशभूषा हास्यपद थी लेकिन उनकी आंखों से अनुशासन झलकता था | उनका आचरण श्रीश अधिकारियों को भी आदेश देने जैसा प्रतीत होता था वह अपने आस पास के लोगो में उनसे निम्नन होने का भाव पैदा कर सकते थे वह जब तक चुप रहते तब तक ही हास्यपद प्रतीत होते | इस बात का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता था की उन्हें मजाक बिलकुल पसंद नहीं और वह अपने काम के प्रति अत्यधिक समर्पित रहने वाले आदमी थे |
डॉ निवासन के पीछे डॉ बत्रा एक गौरे अदमी खड़े थे उन्होंने और डॉ बत्रा का एक दूसरे से इंट्रो करवाया उन दोनों को एक दूसरे के साथ मिलाया वीर को डॉ। निवासन और बत्रा सहकर्मी प्रतीत हो रहे थे |
वीर को वह ज्यादा प्रसनचित आदमी नहीं लगे अपने चेहरे के हाव भाव से वह उद्धिगिन लग रहे थे और ऐसा लग रहा था मानो वह आदमी देखने में डॉ निवासन से भी ज़्यादा पढ़े लिखे लग रहे थे उनकी आँखें किसी बुद्धिजीवी के जैसी थी।
डॉ बत्रा एक लम्बे और लगभग 50 साल की उम्र के आदमी थे और वह सिख समुदाय का हिस्सा थे उनकी आँखें भूरी और चेहरा गोल मटोल था उन्होंने गहरे लाल रंग की शर्ट और काली पतलून पहनी हुई थी जो उनके काले लेदर के जूते के साथ अच्छी लग रही थी उनके शरीर का ज्यादातर मोटापा उनके पेट के चारो और जमा हुआ था उनकी दाढ़ी उनकी मूंछ से मेल खाती हुई एक अंदाज में काटी हुई थी उन्होंने अपने सीधे हाथ में एक कड़ा और उलटे हाथ में एक रोमन नंबर वाली घडी पहनी हुई थी |
“क्या यह वही है?” डॉ निवासन ने अपनी भरी आवाज़ और दक्षिण भारतीय लहज़े में पूछा |
“ौनो सर !” वीर ने तेलगु में जवाब दिया और तुरंत अपने आप को ठीक करते हुए कहा, “मेरा मतलब जी सर |”
तो हम किसका इंतज़ार कर रहे है ? इसे पूछताछ कक्ष में लेकर जाओ |” (Unexpectedstories.in)
गॉर्डस उस आदमी को पकड़कर खींचते हुए वीर के पीछे चले उन्होंने एक (L) आकृति के गलियारे में प्रवेश किया डॉ। निवासन सीधे चलते चले गए और वीर उनके पीछे चलता गया गलियारे एक तरफ सीधी दिवार और दूसरी तरफ दरवाजो के बीच था जो दायीं ओर को मुड़ता था उस दिवार के आंत में एक मात्र दरवाजे पर दो सुरक्षाकर्मी थे जिन्होंने उन्हें अंदर जाने दिया |
वीर अब तक इस बात से अनभिज्ञ था की इस आदमी से क्या पूछताछ की जानी चाहिए है ?
जिस कमरे में उन्होंने प्रवेश किया वह 12 फ़ीट ऊँचा और गुम्बद की तरह वह भी आलिशान सजावट से सुशोभित था |
कमरे में स्टील की एक कुर्सी राखी हुई थी जिसमे पैर रखने के लिए निचे एक तखत, कमर टिकने के लिए दो लोहे की रोड काली लैदर सीट और हथकड़ी लगे हुए कुर्सी के हत्थे सम्पूर्ण कक्ष का सार प्रदर्शित कर रहे थे वह एक प्रयोगशाला जैसा प्रतीत हो रहा था कुर्सी के चारो ओर पोलिश की हुई लकड़ी की मेज रखी हुई थी हर मेज पर एक कम्प्यूटर रखा हुआ था वहां एक प्रोजेक्टर भी छत्त से लटका हुआ था और उसके सामने सफ़ेद पर्दा दिवार पर कील से टंगा हुआ था बंदी बीच में कुर्सी पर बैठेगा और प्रशनकर्ता उससे कैसे भी करके प्रश्नो के उत्तर पता लगाएंगे |
रक्षको ने आदमी को खींच कर बीच में कुर्सी पर धकेला और कुर्सी पर लगी हथकड़ी से बांध दिया उसकी कमर सर और पैरो को भी लेदर की पट्टी के सहारे कुर्सी से बांध दिया गया फ़िलहाल उसकी उंगलियां ही उसके शरीर का एकमात्र हिलने वाला हिस्सा थी |
इस दौरान वीर चुप चाप बैठा कैमरा को देख रहा था एहसास था की न केवल बंदी बल्कि कमरे में बाकी सब पर भी नज़र राखी जा रही रही थी |
सुबह के लगभग 11 बज रहे थे जब आदमी को होश आने लगा उसकी आँखें बंद थी लेकिन वह महसूस कर सकता था की कोई गीले कपडे से उसके चेहरे पर लगे सफ़ेद रंग को साफ़ कर रहा था उसने किसी को उसके बारे में बात करते हुए सुना बातचीत उसके एक अघोरी होने पर थी |
“यह कितना अजीब दीखता है | यह कैसा अप्रिय रूप है ?” एक लड़की ने कहा |
“मुझे पता है यह कौन है।” एक भरोसेमंद आवाज़ में जवाब आया। आवाज़ एक आदमी की थी |
“इस अजीब आदमी का इंट्रो देने से पहले तुम बताओ के तुम कौन हो?” लड़की ने पूछा |
“अभी” आदमी ने तुरंत जवाब दिया |
“और तुम इसे कैसे जानते हो ?” लड़की ने पूछा |
में इसे नहीं जनता हूँ और न यह जनता हु की यह कौन है लेकिन में जनता हु की यह एक अघोरी है |”
“अघोरी?” लड़की ने चौंक कर पूछा जैसे उसने यह शब्द पहले कभी सुना ही न हो |
अघोरी यह शब्द अपने आप में ही शरीर में कम्पन पैदा करने के लिए काफी है भारत और नेपाल के हर एक गाओं या कसबे में अघोरियों के बारे में कहानियां है कहा जाता है की उनके पास नेचर पर नियंत्रण करने और असीमित शक्तियां होती है जैसे की मृत्यु पर जीत प्राप्त करना भौतिक वस्तुओ का प्राकट्य मानव मॉस और मल को खाना और अत्यधिक अशुद्धता में रहना और कभी कभी तो पूरी तरह से नंगे भी रहना अघोरी कई भयंकर प्रथाओं में भी शामिल होते है जैसे शुद्ध-अशुद्ध के बीच के दंड को ख़तम करने के लिए और मन की अद्वैत अवस्था को प्राप्त करने के लिए मरे हुए शरीर के साथ सम्भोग |
बजाए की खोज करने के लिए उन पर ऐसा जूनून सवार रहता है की वह ऐसी कोई कुरूप अशुद्ध और सामाजिक वर्जनाओ में लिप्त रहते है वह मदिरापान करते है नशीले पदार्थो का सेवन करते है और मांस खाते है कुछ भी वर्जित नहीं माना जाता लेकिन उनकी प्राचीन परम्पराओ को विचित्र बनाने वाली बात यह है की उनके मंदिर शमशाम घाट होते है उनके कपडे मरे हुए लोगो के शरीर से आते है जलाऊ लकड़ी अंतिम संस्कार की चिता से और भोजन नदी से जब किसी व्यक्ति की चिता जलाई जाती है तो वह मृतकों की राख से खुद को पोत लेते है और उनके ऊपर बैठकर ध्यान करते है वह एक मानव खोपड़ी से बने कटोरे के साथ भिक्षा मांगकर जीवित रहते है लेकिन फिर भी अघोरी जीवन का सबसे चौकाने वाला पहलु उनका नरभक्षक है।
लाशें जिन्हे या तो नदी से खींचा गया है ( जैसे गंगा ) या शमशान घाट से प्राप्त किया है उन्हें कच्ची या पकी हुई दोनों तरह से खाया जाता है क्योंकि अघोरियों का यह मन्ना है की जिसे दूसरे लोग मरा हुआ इंसान मानते है वह असल में कुछ नहीं बल्कि एक प्राकर्तिक अवस्था है जो अब जीवन ऊर्जा से रहित है जो कभी उसमे हुआ करती थी इसलिए जहा नरभक्षक आम लोगो के लिए असभ्य जंगली और अशुद्ध है वही अघोरियों के लिए यह संसाधनपूर्ण और रूढिवाधिताओ को एक आध्यात्मिक अन्वेषण में बदलने का साधन है की कुछ भी अपवित्र या भगवान से अलग नहीं है वास्तव में वह इसे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखते है की तत्व कैसे एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होता है !
उत्तरी भारत की सड़को पर कई अघोरी साथ घूमते हाथ में खोपड़ी का कटोरा लिए देखे जा सकते है वह कभी भी अपने बालों को काटने की जरुरत नहीं समझते वह अपने शरीर का इस्तेमाल कर बेहये और पूर्व धारणाओं पर विजय पाने के लिए सत्य एवं भेदभावपूर्ण मार्ग पर चलने और परम अवस्था को प्राप्त करने की साधना करते है सदियों से वह अपनी अजीब और रहस्यमय जीवन – शैली से दुनिया भर के लोगो को मंत्रमुग्द करते आ रहे है |
अघोरियों के अतीत को देखा जाये तो पता चलता है की सर्वप्रथम अघोरी जिसने भविष्य के अघोरियों के जीवन की नीव रखी उसका नाम ‘किना राम’ था माना जाता है की वह 150 साल तक जीवित रहा और 18वीं शताब्दी के अंतिम चरण के दौरान उसकी मृत्यु हो गयी |
” अघोरियों का विश्वास है की शिव परम और सर्वशक्तिमान सर्वभूत और सर्वज्ञ है | उनके अनुसार इस भ्रामान में जो कुछ भी होता है वह शिव की मर्जी से होता है | देवियों में उनके लिए माँ काली का रूप सबसे पवित्र है |” एक और आवाज़ ने बातचीत में हस्तक्षेप किया इस बार आवाज़ आदमी के बहुत करीब थी |
डॉ। बत्रा बातचीत में शामिल होकर बोले ” अघोरी दवा करते है की उनके पास आज के समय में मौजूद सबसे भयंकर बिमारियों यहाँ तक की एड्स और कैंसर की दवाइयां उपलब्ध है | यह दवाइयां जिन्हे वह मानव तेल से सम्बोधित करते है वह एक शरीर के जलने के बाद जलने वाली आग से जमा की जाती है |” हालाँकि वैज्ञानिक रूप से उनका टेस्ट नहीं किया गया है पर अघोरियों के अनुसार वह बहुत फायदेमंद है |” बंदी महसूस कर सकता था की डॉ। बत्रा अघोरियों पर अपने ज्ञान का प्रभाव डालते हुए उसके हाथ में एक सिरिंज इंजेक्ट कर रहे थे | (Unexpectedstories.in)
बर्फ से ढके पहाड़ो से लेकर गरम रेगिस्तान और बाघ आक्रांत जंगलों तक वह उन सब स्थानों पर रहने के लिए जाने जाते थे जहा कोई और इंसान जिन्दा नहीं रह सकता |”
अभी बात को आगे भड़ाता हुआ बोला, अघोरियों के लिए कुछ अशुद्ध बुरा या घिनोना नहीं है उनके अनुसार अगर आप सबसे विकृत कार्य करते हुए भी भगवान पर ध्यान केंद्रित कर पाते है तो आप भगवान के साथ एकरूप हो जाते है | अधिकतर आबादी की शमशान घाट में एक शरीर के ऊपर बैठकर साधना करने की हिम्मत नहीं होगी|
अघोरियों का मन्ना है की हर कोई एक अघोरी ही पैदा होता है | एक नवजात बच्चा अपने मल गंदगी और खिलोने के बीच अंतर नहीं करता बल्कि सबसे खेलता है। वह माता – पिता और समाज के द्वारा बताये जाने पर ही उनमे अंतर करना शुरू करता है। जैसे – जैसे बचा बड़ा होता है और भौतिकवादी आधार पर चयन करने लगता है तभी वह अघोरी होने के लक्षण खो देता है| हम बच्चो को भगवान का रूप मानते है |
संक्षेप में, अघोरियों के विचार
“अघोरियों का मानना है की शवों के बीच सम्भोग करने से आलोकिक शक्तियों का जन्म होता है | महिला साथियों को भी मरे हुए लोगो की राख से पूता जाता है। योन क्रिया के दौरान ढोल पीटना और मंत्रो का जाप किया जाता है। वह यह सुनिचित करते है की महिला को उसके साथ योन सम्बन्ध बनाने के लिए मजबूर न किया गया हो और यह भी जरुरी है की महिलाओं को सम्भोग क्रिया के दौरान मासिक धरम होना चाहिए | अब जब आप वाराणसी जैसे शहर में नरभक्षक का अभ्यास करते है जहा मांसाहारी भोजन के भी प्रति असहमति प्रकट की जाती है , आप जानते है की आप अपने लिए मुसीबत पैदा कर रहे है। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है की सार्वजानिक रूप से मानव मॉस का सेवन करने के बाद भी उनके खिलाफ कोई विशेष कारवाही नहीं की जाती है ! ऐसा इसलिए हो सकता है की वह मरे हुए इंसानो का मांस खाते है और उसे खाने के लिए किसी को मारते नहीं है। सच्चे अघोरी भोले, प्यारे और दयालु होते है और हमेशा मिलने पर आपको आशीर्वाद देते है। वह अपना ज़्यदातर समय ध्यान करने में और ॐ नमः शिवाये का जाप करने में बिताते है।”
ॐ शब्द उस बेहोश अद्घोरी के कानो में गुंजी और धीरे से उसने अपनी आँखें खोली |
More stories click here:- Unexpectedstories.in
Follow me on my social media accounts:-
Instagram:-https://www.instagram.com/hemantsalwan2/?igsh=MWg1amtpOWt4ZGYybA%3D%3D#