Unexpectedstories.in “मुझे नहीं समझ आ रहा है की यह आदमी क्या बोल रहा है ?” शाइना उत्तेजित होकर चिल्लाई |
ओम शास्त्र एक पल के लिए चुप रहा और फिर बिना किसी चेतावनी के वहां मौजूद लोगो की धारणा के विपरीत अचानक वह जाग उठा|
शाइना जो ओम शास्त्र के ज्यादा पास बैठी थी, चौंक उठी और उससे दूरी बनाने की कोशिश में कुर्सी पर से गिर पड़ी| कमरे में और सभी लोग भी हैरान हो गए| शाइना ने सोचा की ‘यह कैसे संभव है? अभी एक घंटा भी नहीं हुआ है, यह एकदम से होश में कैसे आए गया?’ उनके 300 से ज़्यादा मरीजों के अनुभव में आज तक कोई आदमी बिना शारीरिक परेशानी के इतनी जल्दी सम्मोहित निंद्रा अवस्था से नहीं उठा था |
डॉ। बत्रा भी उतने ही स्तब्ध थे| दवाओं के बारे उनका ज्ञान यह कहता था की मरीज को खुराक दिए जाने के 8 घंटे से पहले उसे होश नहीं आ सकता| इसने उनके द्वारा अध्यन और अभ्यास किये सभी मापदंडो की अवहेलना कर दी थी| L.S.D भी अपना डर छिपा नहीं पा रही थी| उनमे से किसी को भी समझ नहीं आ रहा था की क्या चल रहा है!
ओम शास्त्र बिना मुक्त होने की कोशिश किये सभी को देख रहा था| उसने शांति से पूछा, मैं यहाँ क्यों लाया गया हु? तुम लोगो को क्या चाहिए?” वह निराश लग रहा था|
शाइना ने उसके सवाल का उत्तर नहीं दिया| उसने डॉ। निवासन की ओर देखा| ओम ने भी उनकी तरफ देखा|
“तुम यहाँ हो, क्योंकि कुछ जवाब है जो हमे चाहिए| हमे क्या चाहिए? कुछ नहीं, बस वही जानकारी, जो तुम्हारे पास है|” डॉ। निवासन ने अपने रोबीले अंदाज़ में जवाब दिया|
“कितना जानते हो मेरे बारे में?” ओम ने पूछा|
“खैर, अभी के लिए तो ज्यादा कुछ नहीं| बस, इतना ही की ओम शास्त्र तुम्हारी असली पहचान नहीं है और तुम किसी बंदा बहादुर और संजय को जानते हो और यह की विधुर और विष्णु गुप्त, तुम्हारे द्वारा इस्तेमाल किये गए अन्य दो नकली नाम रह चुके है|”
ओम शास्त्र ने अपनी आँखें कसकर बंद कर ली और एक दुःख की लेहेर उसके चेहरे पर चाह गयी|
इस समय डॉ। निवासन अपना आपा खोते हुए आधिकारिक स्वर में बोले, “मेरा नाम डॉ निवासन रओ है| मैं नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस कम्युनिकेशन एंड इनफार्मेशन रिसोर्स का सेवनीरवत वैज्ञानिक रह चूका हु और अब में इस टीम का नेतृत्व कर रहा हूँ|”
“मैं जनता हूँ, आप कौन है!” ओम ने जवाब दिया|
डॉ बत्रा ओम को दवा से इंजेक्ट करने के लिए उसके करीब गए|
ओम ने शुरू में विरोध करने का प्रयास किया और चिटखते हुए बोला, मैं मिडाज़ोलमा, पलुनाइट्राजेपाम, बारबिट्यूरेट्स और ामोबार्बिटल से प्रतिरक्षित हूँ| यह आपकी सहायता ज्यादा देर तक नहीं कर सकता|” यह ॐ के बेहोश होने से पहले आखिरी शब्द थे| उसकी तेज आवाज़ सुनकर दो रक्षक उसे उसकी जगह पर थामे रखने के लिए आ गए|
डॉ बत्रा ने उन् दवाओं के नाम सुनकर, जो नारकोटिक्स टेस्ट में प्रयोग की जाती है और जो उन्होंने अभी ओम शास्त्र को भी दी थी, आश्चर्यचकित रह गए| लेकिन उन्होंने कोई भाव प्रकट नहीं किया| डॉ शीआना ने उसे अपने नियंत्रण में लेने के लिए उसकी और देखा|
वह आराम से उसके सामने बैठी और उसकी आँखों में गहरायी से देखने लगी| शाइना की सूंदर आंखों में किसी भी व्यक्ति को सम्मोहित करने का जादू और शक्ति थी| वह बिना पलकें झपकाए मधुर आवाज़ में बोलती थी| जब उन्होंने ओम शास्त्र के कंधो को छुआ, वह एकदम ढीला होकर एक तरफ लुढ़क गया|
डॉ निवासन के मैं में वह अजीब शब्द दर्ज हो गए- ‘मैं जानता हूँ, तुम कौन हो!’ जो ओम के लिए बिलकुल नहीं कहना चाहिए था| डॉ नेवासन ने आश्चर्य से सोचा, ‘यह कैसे?’
“क्या यह फिर से पूछताछ के लिए तैयार है?” निवासन ने पूछा|
डॉ बत्रा ने एक उपकरण में कुछ पढ़कर कहा, अभी नहीं, सर|”
“वह क्या बड़बड़ा रहा था?” L.S.D ने रूखी आवाज़ में पूछा|
“संस्कृत” प्रेम ने कहा|
प्रेम का परिचय
प्रेम 35 साल का व्यक्ति था, जो महाराष्ट्र के क्षेत्रफल नामक गाओं से आया था|
वह स्वभाव से अंतर्मुखी था| उसने भारतीय इतिहास में P.H.D की थी| उसका अपने विषय में ज्ञान असीमित था, लेकिन अपनी बात रखने के लिए उसमे आत्मविश्वास की कमी थी| उसके आत्मविश्वास में कमी का कारन था उसका हालाँकि, जो उसके लिए दुसरो के साथ तालमेल बैठाने में सबसे बड़ी बाधा था और इसीलिए अक्सर उसे लोगो द्वारा नज़रअंदाज़ किया जाता था| उसकी चुप्पी के कारण उसकी उपस्तिथि या अनुपस्तिथि का कोई प्रभाव नहीं था|
प्रेम 6 फ़ीट से 2 इंच छोटा था| उसकी त्वचा चिकनी थी और वह बहुत खूबसूरत था| उसने भूरे रंग की चेक की शर्ट के साथ काले रंग की जीन्स पहन रखी थी और सफ़ेद स्पोर्ट्स वाले जूते| उसकी आंखें और उसके बाल दोनों गहरे काले रंग के थे और बालो में तेल लगाया हुआ था| उसके भोले-भाले परेशां और सुझावों के कारण उसे टीम में उसका मनचाहा महत्व नहीं दिया गया था|
“संस्कृत! इस शताब्दी में संस्कृत कौन बोलता है?” L.S.D ने उत्तेजित होकर कहा|
“वह|” प्रेम ने ओम शास्त्र की तरफ इशारा करते हुए कहा|
हाँ, लेकिन आज के समय में किसके पास उसकी भाषा समझने का समय है?” L..S.D ने कहा|
“मेरे पास|” प्रेम ने फिर से उत्तर दिया|
“सुषेण|” अभी ने धीरे से अपने आप से कहा|
“क्या?” L.S.D ने अभी की आवाज़ सुनकर पूछा|
“कुछ नहीं|” अभी अपने आप को वापस नियमित करते हुए बोला| L.S.D ने आग्रह करते हुए कहा, “नहीं, मैंने तुम्हे उस आदमी द्वारा कुछ समय पहले लिए गए नाम को दोहराते हुए सुना|”
अभी ने जवाब दिया, “सुषेण|”
“हाँ, वही नाम| यह क्या है, बताओ मुझे|” L.S.D ने आग्रह किया| प्रेम भी बातचीत में शामिल हो गया|
“सुषेण बहुत ही काम इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है| मेरी जानकारी के अनुसार, सुषेण ‘रामायण’ में एक वेध का नाम था, जिसने भगवन श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण के लंका के यौराज मेघनाथ के साथ युद्ध में घायल होने पर संजीवनी नामक जड़ी-बूटी, जो बहुत मुश्किल से हिमालयन पर्वत पर पायी जाती है, वह मंगवाई थी| भगवान राम ने हनुमान जी को सुषेण की सलाह के अनुसार, संजीवनी बूटी लाने का आदेश दिया था| हनुमान जी हिमालयन पर्वत पर पहुंचने के बाद संजीवनी बूटी और अन्य जड़ी-बूटी में अंतर नहीं कर पाए और इसीलिए उन्होंने पूरा पर्वत ही अपने कंधे पर उठाकर कन्याकुमारी की और उड़ान भरी, ताकि सुषेण खुद ही चयन कर सके|”
“हाँ, मैंने वह पौराणिक तस्वीर देखी है, जिसमे हनुमानजी पहाड़ को लेकर उड़ रहे है| क्या तुम उसी की बात कर रहे हो?”
“हाँ, लेकिन मुझे रामायण में सुषेण के अंत का कोई उल्लेखन याद नहीं है|”
इस आदमी के बारे में सब कुछ आसाधारण है| मैंने इससे पहले जो कुछ भी देखा है, वह इसके करीब भी नहीं था|” शाइना ने कहा| वह अपने विचारो में खोयी हुई थी|
अपने मन में आये विचारो को रोकते हुए वह डॉ निवासन की और मुड़ी और विनम्रता से उसने पूछा, “सर, हमे कम-से-कम स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए की हम किस उदेश्ये से जाँच कर रहे है?”
सब ने जवाब की उम्मीद करते हुए डॉ निवासन की ओर देखा|
“तुम यहाँ इसी काम के लिए हो|” डॉ निवासन से कहा, “इसीलिए, अपने काम पर ध्यान दो और जितना हो सके, उतना उससे बातें जानने की कोशिश करो, ताकि हम और अच्छे से जान सके की हम क्या कर रहे है!” डॉ निवासन शाइना को घूरते हुए बोले|
उनका स्वभाव बहुत रूखा था और शाइना के चेहरे के भाव से यह लग रहा था की उन्हें यह बात अच्छी नहीं लगी| सभी लोग काम पर वापिस लग गए|
प्रेम डॉ बत्रा की तरफ गया और चिंतित स्वर में उसने पूछा, “डॉ बत्रा, आ…आप ठीक तो है न ?”
डॉ बत्रा स्पष्ट परेशां दिख रहे थे| वह अपने आप को सँभालते हुए बोले, “क्या? हाँ! हाँ|”
“हम ए ….एक दू…दूसरे को अच्छे से नहीं जानते है| ले…लेकिन हम यहाँ टीम की त…तरह काम कर रहे है| आप कु…कुछ परेशां लग रहे है| सब ठीक तो है न?” प्रेम ने चिंतित स्वर में दोहराया|
प्रेम द्वारा दिखाई गयी इस भवन से वह सहज महसूस कर रहे थे और उन्होंने उसके कान में धीरे से कहा, “यह आदमी एक घंटे के अंदर ही उठ गया|”
“तो?” प्रेम को कुछ समझ में नहीं आया|
“ऐसे कैसे हो सकता है? यह संभव नहीं है|” डॉ बत्रा ने आश्चर्य से अपनी आँखें बड़ी करके कहा|
C”संभव नहीं है! आपका क्या मतलब है? हम सबने उसे उठ ते हुए देखा|” प्रेम ने भोलेपन के साथ पूछा|
H”वही तो! वही चीज़ तो मुझे परेशां करे जा रही है| प्रेम, उस दवा की केवल एक खुराक इंसान को चार से पांच घंटे तक सुला देती है| क्या तुम जानते हो? पहली खुराक से वह बेहोश नहीं हुआ था| फिर मैंने उसे सामन्य से दोगुनी खुराक दी| वह थोड़ी देर के लिए तन्द्रा में आया, लेकिन फिर भी होश में था| मैंने उसे उतनी ही खुराक दुबारा दी| ऐसी खुराक एक व्यक्ति को मारने के लिए काफी है और वह सिर्फ एक घंटे के अंदर ही फिर होश में आ गया|” डॉ बत्रा समझते हुए बोले|
“यह मेरी जानकारी और योग्यता पर एक प्रश्नचिंन है| मुझे यह पता लगाना होगा की यह कैसे हुआ?” दरिद्रता से डॉ बत्रा ने कहा|
जो कुछ भी डॉ बत्रा ने कहा, वह प्रेम की समझ से बहार था| इसीलिए बचने के लिए उसने पूछा, “क्या आपने यह डॉ निवासन को बताया?”
“हाँ, मैंने बताया| शायद डॉ निवासन को ॐ शास्त्र ऐसी चीज़ों का ज्ञान है, जिनके बारे में हम कुछ नहीं जानते| जब ॐ शास्त्र ने डॉ निवासन को देखा तो उसने उनके उपनाम से बुलाया, “चिन्ना’!”
“उसे कैसे पता चला?” प्रेम हैरान था|
“यही तो बात है| उसे यह सब कैसे पता हो सकता है?”
“एक व्यक्ति, जो डॉ निवासन का उपनाम जानता है और अपना खुद का नाम न जानने का दावा करता है|”
क्या तुम किसी मिशन पर हो?” डॉ शाइना दुबारा चौकस होकर बैठ गयी|
“हाँ|” ओम शास्त्र ने अपना सर हिलाते हुए जवाब दिया|
सभी के चेहरों का रंग उड़ गया|
डॉ निवासन के मस्तिष्क की रेखाएं उनकी उलझन को प्रकट कर रही थी|
एक आतंकी से पूछताछ करने के बारे में सोचकर ही, जिसे इतना महत्व दिया जा रहा था की अलग-अलग क्षेत्रों के सर्वश्रेष्ट लोगो को इस पृथक सुविधा केंद्र में एक साथ लाया गया था, L.S.D तनावग्रस्त हो गयी| एक बार के लिए डॉ शाइना भी डर गयी थी|
“मुझे पता था! यह एक मुसलमान है| यह एक मुसलमान जैसा दिखता भी है|” गर्व से अभी ने कहा|
लोगो के बीच जाती और धर्म के नाम पर भेदभाव करने की उसकी आदत थी| शाइना ने उसे अनदेखा करते हुए आगे पूछा-
“तुम्हारा क्या मक़सद है?”
“छुपाना और छुपे रहना|” ओम ने कहा|
“क्या छुपाना?”
“मेरी वस्तुये|”
“तुम उसे कहा छुपाते हो?”
“मेरी स्मृतियों में…और लाकर में |”
“किसके लिए तुम उसकी रक्षा कर रहे हो?”
“मानव जाती के लिए|” ओम ने एक दिव्य मुस्कान के साथ कहा| बिना किसी प्रशन्न के ओम ने कहा, “नहीं, मैं कोई आतंकवादी नहीं हूँ|”
शाइना ने अपना आपा खो दिया| वह बाकि सब की और मुड़ी और उन्हें एहसास हुआ की सभी एक ही नाव में थे| डॉ निवासन किसी से फ़ोन पर बात कर रहे थे| उन्होंने शाइना का चेहरा देखते ही फ़ोन रख दिया और पूछा, “क्या हुआ?”
मेरे बिना किसी प्रश्न के ही इसने जवाब दिया| भला किसने इससे एक आतंकवादी होने के बारे में पूछा?” शाइना ने हैरान और हताश होकर टीम से पूछा|
“लिसा सेमुअल डिकोस्टा|” ओम ने जवाब दिया|
“मैं प्रेम से उसके आतंकी होने की सम्भावना के बारे में बात कर रही थी; लेकिन मैंने बहुत धीरे से बोला था| L.S.D ने मानते हुए कहा| प्रेम ने सहमति जताते हुए सर हिलाया|
“उसने कैसे तुम्हे सुना और मैंने नहीं?” चिंता से शाइना का चेहरा गंभीर हो गया|
“मैं तुम्हारे ज्यादा करीब बैठी हूँ|”
L.S.D नहीं जानती थी की उसे क्या कहना चाहिए, इसीलिए वह चुप रही|
दोपहर हो चुकी थी और ओम शहस्त्रा ने एक बार फिरसे अपनी जाग्रत अवस्था का एहसास कराया| वीर ने अपनी घडी की ओर देखा, जो दोपहर के 1:45 बजा रही थी| वो गॉर्डस को देखने कमरे से बहार गया| इस दौरान ओम ने डॉ शाइना की भयभीत आंखों को देख कर कैसे कहा, जैसे एक पिता अपनी बेटी से कह रहा हो, “तुम्हे अपने उत्तर प्राप्त करने के लिए ऐसा करने की जरुरत नहीं है| तुम जैसे चाहो, मुझसे निपट सकते हो| बिना किसी भय के आगे बढ़ो| मैं किसी को कोई हानि नहीं पोहचाऊंगा| मैंने कभी ऐसा नहीं किया है| मुझ पर भरोसा रखो, में तुम्हारी सहायता करूंगा|”
शाइना को कुछ बोलते नहीं बना|
डॉ बत्रा कमरे के पार डॉ निवासन के पास गए और बोले, “मुझे इसे जांचने के लिए आपकी अनुमति चाहिए|” वह बहुत उत्तेजित थे| डॉ निवासन ने डॉ बत्रा की सहायता करने का कष्ट नहीं किया| वह अपने काम में लगे रहे|
शाइना ओम को छोड़कर बाकि लोगो के पास चली गयी|
“हाँ, शाइना?” डॉ निवासन ने उन्हें अपनी ओर आते देख पूछा
“सर, मेरा सुझाव है की हम बिना किसी ड्रग या सम्मोहन के उससे पूछताछ करने की कोशिश करते है|” शाइना ने विनती की|
डॉ बत्रा को शाइना की बात हासीपद लगी, लेकिन वह चुप रहे|
“हम ऐसे कर सकते है, लेकिन उसके शब्दों की सचाई की जिम्मेदारी कौन लेगा? और यह कैसे पता लगेगा की वह सच ही बोल रहा है?” डॉ निवासन ने दृढ़ता से अपनी बात कही|
“लेकिन इससे भी तो कुछ नहीं हो रहा है|” डॉ शाइना ने कहा|
“कृपया मुझे एक बार उसकी जांच करने दीजिये, सर| मुझे उसके खून का सैंपल चाहिए|” डॉ तेज ने रिक्वेस्ट की|
“वह कोई परीक्षण की चीज़ नहीं है, जी पर तुम खोज कर सको, तेज! मैं तुम्हे इस विशेष अधिकार की अनुमति नहीं दे सकता|” डॉ बत्रा को केवल यही जवाब मिला|
डॉ बत्रा और डॉ शाइना ने एक दूसरे की तरफ देखा, जैसे कह रहे हो की हम एक ही नाव में सवार है|”
एक गहरी सांस के साथ शाइना ने कहा, ठीक है, “सर, तो अब हमे क्या करना चाहिए?”
डॉ निवासन के फ़ोन की घंटी बजी| उन्होंने फोन को अपनी जेब से निकाला और कॉलर का नाम देख कर वह बेचैन हो गए|
“आप सभी थोड़ी देर आराम कीजिये और उसके बाद अगले सेशन की तयारी करे|” फ़ोन उठाने से पहले डॉ निवासन ने जल्दबाज़ी में कहा| वह कमरे के बहार चले गए|
डॉ निवासन के जाते ही वातावरण में कुछ सहजता आ गयी| L.S.D के चेहरे पर एकदम से एक मुस्कान आगयी थी|
प्रेम ने अभी की और देखा और फिर L.S.D की ओर| डॉ बत्रा परेशां थे, क्योंकि उनके पास सवालो के जवाब नहीं थे|
वैसे ही, डॉ शाइना की नज़र ओम शास्त्र पर थी, जो उत्सुकता से अपने आस पास की चीज़ों और लोगो को देख रहा था| जैसे ही उसने शाइना की ओर देखा, उन्होंने अपनी नज़रे मोड़ ली|
उसी समय सिक्योरिटी शेफ कमरे में दो अन्य गॉर्ड के साथ आया| वो भारी आवाज़ में बोला, “सभी लोग कृपया इस तरफ आये|” और अपने हाथ से द्वार की ओर इशारा किया| सभी को कुछ पल का समय लगा बहार निकलने के लिए| वीर और ॐ शास्त्र को 1 घंटे के लिए कमरे में अकेले रहना था|
दूसरा कमरा जांचकर्ताओं द्वारा व्यस्त था| डॉ तेज अपने परिवार से अपनी मातृभाषा में बात कर रहे थे| प्रेम,L.S.D. और अभी आराम से लड़की की एक मेज के चारो और बैठे हुए थे| डॉ शाइना ने कुछ समय के लिए अकेले रहना ही ठीक समझा| वह एक दूसरी मेज के पास बैठकर अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी|
प्रेम अपने शब्दों के साथ संघर्ष कर रहा था, L.S.D. अपने उपकरणों के साथ और अभी अपने गर्व में डूबा हुआ था| वह अपने और अपने पेशे के बारे में बात कर रहे थे|
“आप भी हमारे साथ आइयें न, डॉ शाइना? चलिए एक-दूसरे को थोड़ा जाना जाये|”L.SD. ने डॉ शाइना को आमंत्रित करते हुए कहा|
“जरूर! मैं 5 मिनट में आती हूँ|” डॉ शाइना ने कहा|
चूँकि वह उन सबसे वरिष्ठ थी, वह उनके बारे में उनकी फाइल के द्वारा सब कुछ जानती थी| वह इन लोगो के साथ यह जानते हुए आयी थी की उन्हें किन लोगो के साथ काम करना होगा, लेकिन यह नहीं जानती थी की कितने समय तक करना होगा? वह अभी के बराबर वाली खाली कुर्सी पर बैठ गयी| जैसे ही डॉ शाइना बैठी, अभी खड़ा होकर दूसरी तरफ चला गया और अपनी जगा प्रेम के साथ बदल ली| सभी को उसके यह भेद भाव भरा व्यवहार दिखा और समझ में आया, किन्तु किसी ने कुछ नहीं कहा| डॉ शाइना शर्मिंदा हो गयी|
डॉ बत्रा अभी भी फ़ोन पर बात कर रहे थे|
उस डायरी में क्या है?”L.S.D. ने खुले रूप से डॉ शाइना के हाथ में डायरी की ओर संकेत करते हुए पूछा|
मैं बस पूछताछ में होने वाली सभी सामान्य और असामान्य घटनाओ का हिसाब रख रही हूँ| बाद में जाँच करने में लाभदयी साबित होता है|” डॉ शाइना ने मुस्कान के साथ जवाब दिया|
“को…कौन सी आसा… सामान्य घटनाये?” प्रेम ने अपने सव्भाविक तरीके से पूछा|
“तुमने देखा, वह मामूली सवाल नहीं पूछता है| जब वह होश में आता है तो चिंतित होकर पूछता है की हम कौन है, क्या कर रहे है आदि, मानो उसके मन में उसे पहले से ही पता हो की वह एक दिन पकड़ा जायेगा|”
“शा…शायद उसने यह पहले भी अनुभव किया हो,शा… शायद उसे पता हो की हम क…. क्या ढूंढ रहे है|”
“इतने भाग्यशाली तो हम भी नहीं है की हमे पता हो की हम उससे क्या चाहते है!” शाइना ने एक अप्रस्संता वाले लहजे में कहा|
“ओ…और कौन से असामान्य भ…भाव उसने व्य…व्यक्त किये है?” प्रेम ने हकलाते हुए पूछा|
“वह मेरे द्वारा किये गए सम्मोहन विद्या के जादू को बिना किसी पूर्व संकेत के तोड़ देता है| यह एक तेज प्रक्रिया है, मानो वह सामन्य रूप से सो रहा था और अचानक से उठ गया|” शाइना ने चुटकी बजाकर उसे एकदम से उठ जाने को समझाते हुए कहा|
“डॉ ब… बत्रा भी वो दवा, जिसका सामान्य रूप से असर कुछ घंटो के लिए रहता है, उस पर को…कोई असर न हो…होने के कारण बहुत चिंतित है|” प्रेम ने कहा|
“मैं व्यक्तिगत रूप से डॉ बत्रा की उपस्तिथि से भयभीत हूँ| पता नहीं क्यों, वह हमेशा गुस्से में ही रहते है!” L.S.D. ने कहा|
“डॉ बत्रा अच्छे व्यक्ति हैं| वह कुछ मुश्किल समय से गुजर रहे है, और कुछ नहीं|” शाइना ने समझाया|
“ओह…आप उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते है?”L.S.D. ने पूछा|
“हाँ, हमने पहले एक साथ काम किया है|”
“तो? उन्हें क्या परेशानी हो रही है?”
वह सामान्य रूप से ऐसे व्यव्हार नहीं करते है| दरअसल, वह इसीलिए उदास है, क्योंकि उनकी पत्नी मृत्यु-श्या पर है; हालाँकि, वह एक प्रख्यात चिकित्सक हैं, लेकिन इसके बारे में वह कुछ नहीं कर सकते| बस, यही उनके निराश होने का कारण है” शाइना ने सहानुभूति जताते हुए कहा|
L.S.D. ने स्तिथि को समझे बिना ही अपनी राये बनाने के लिए खुद की आलोचना की और साथ ही उसे शाइना से कुछ ईर्ष्या हुई की उन्होंने यह सारी बात कितनी आसानी से समझ ली|
कुछ देर के लिए वहां शांति छह गयी, क्योंकि डॉ शाइना यह विचार करने लगी की डॉ बत्रा किस मानसिक पीड़ा में होंगे?
एक समझदार व्यक्ति परेशानी से पहले की तुलना में और समझदार बनकर निकलता है| डॉ बत्रा वास्तव में एक बुद्धिमान व्यक्ति है| डॉ शाइना ने विचार किया|
“प्रेम, ओम शास्त्र ने संस्कृत में क्या कहा था?” डॉ शाइना ने बातचीत को फिर से शुरू करते हुए पूछा|
प्रेम ने कहा, “वह एक श्लोक था| मुझे पूरा समझ में नहीं आया, लेकिन मुझे लगता है, वह तेजी से समय के साथ मानव जीवन के घटने की बात कर रहा था, जिसका उसे आश्चर्य था| जैसे उसने बोला, मैं वैसे नहीं समझ पाया, क्योंकि मुझ तक पोहचने के लिए उसकी आवाज़ बहुत धीमी थी| यदि मुझे वह एक बार और सुनने को मिल जाये तो उसका सटीक अनुवाद में आपको बता दूंगा|”
“मैं वो आसानी से कर सकती हूँ| में उससे दुबारा बुलवा सकती हूँ|” डॉ शाइना ने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया|
“हमने भविष्य के लिए उसे रिकॉर्ड करना चाहिए|”L.S.D. ने सुझाव दिया|
“क्या? ह… हम पहले से ही रे…रिकॉर्ड नहीं कर रहे है क्या?” प्रेम की आँखों में आश्चर्य साफ़ दिखाई दे रहा था|
उसी समय डॉ बत्रा भी वह आये और अपना सर पकड़कर बैठ गए|
“नहीं|” शाइना ने जवाब दिया|
“क्यों?” प्रेम बहुत हैरान था|
“क्योंकि डॉ निवासन नहीं चाहते की कुछ भी रिकॉर्ड किया जाये|” डॉ बत्रा ने बीच में कहा|
“ओ…और हम उनके आ…आदेश का प…आ…लन कर रहे है?”
“हाँ, क्योंकि वह बॉस है|”L.S.D. ने आँखें घूमते हुए कहा|
“मुझे नहीं लगता के वह बॉस है|” अभी ने सोचते हुए कहा|
“क्या मतलब है तुम्हारा?”L.S.D. ने पूछा|
डॉ बत्रा और शाइना ने एक-दूसरे की ओर देखा और इससे पहले की कोई अभी की बात पर ध्यान दे पता, डॉ बत्रा ने रोकते हुए कहा,”L.S.D., क्या तुम मुझे किसी के बारे में जानकारी दे सकती हो?”
सर, जैसे उपकरण और साधना यहाँ उपलब्ध है, उससे मैं आपको किसी के बारे में कोई भी जानकारी दे सकती हूँ| उनका अकाउंट नंबर,पासवर्ड, इ-मेल, वो किस जगह पर उपस्तिथ थे, वो अभी कहा है? उसने फ़ोन नंबर और उनका व्यक्तिगत विवरण… उनके पैदा होने से लेकर अभी तक की सारी जानकारी|”L.S.D. ने आत्मविश्वास से कहा| उनकी आंखों में चमक थी|
“ठीक है फिर,ओम शास्त्र के बारे में तुम जितना पता लगा सकती हो, लगाओ|” डॉ बत्रा ने सहमति जताते हुए कहा|
ओम और वीर कुछ समय से कमरे में एक साथ थे| ओम पहले की ही तरह बंधा हुआ था| उसकी स्तिथि में कोई बदलाव नहीं था| वीर एक मेज के पास खाली बैठा हुआ था| ओम ने आखिरकार चुप्पी तोड़ते हुए कहा, “क्या मुझे एक गिलास पानी मिल सकता है?” उसने शुष्क आवाज़ में कहा| वीर को लगा, जैसे उसका गाला सुख रहा हो|
“इसके लिए पानी का एक गिलास लेकर आओ|” वीर ने बिना हिले एक गॉर्ड को आदेश दिया|
“तो तुम यहाँ कितने समय से काम कर रहे हो?” ओम ने बात शुरू करने की कोशिश की|
“काफी समय से|” वीर ने टका-सा जवाब दिया|
ओम ने एक गहरी सांस ली और मुस्कुराने लगा|
“तुम क्यों मुस्कुरा रहे हो?” वीर ने चिढ़कर पूछा|
“जल्द ही बारिश होने वाली है और मुझे उसकी सुगंध और आवाज़ बहुत पसंद है|” ओम शास्त्र ने जवाब दिया| उसकी नज़र वेंटिलेटर के जरिये दिख रहे आकाश पर तिकी हुई थी|
उसने गॉर्ड द्वारा लाये गए पानी को गटगट पी लिया|
“बारिश? अभी? गर्मियों में! तुम पागल हो गये हो?” वीर ने कहा| वीर को बहार गलियारे में पीरो की आवाज़ सुनाई दी| वो कमरे से बहार चला गया और बाकि सब अंदर आ गए तथा कुछ ही पलों में सब लोग अपने स्थान पर बैठ गए|L.S.D. उत्साह के साथ चहक रही थी, क्योंकि आखिरकार उसे कुछ काम करने के लिए दिया गया था| अभी असमंजस के भाव से ओम शास्त्र को एक टक देख रहा था|
ओम शास्त्र भी अभी को घूर रहा था| डॉ बत्रा दूसरे सेशन के लिए तैयार थे| अचानक उन्हें याद आया की वह कुछ भूल गए है|
L.S.D.” के पास जाकर वह फुसफुसाते हुए बोले, “ओम ने एक लॉकर का भी ज़िकर किया था, जहा वह अपनी जानकारी सुरक्षित रखते है| उसके बारे में भी जाँच करना|”
“जी सर!” L.S.D. ने कहा|
डॉ निवासन वापस अंदर आगये और टीम के सभी साथियों का निरिक्षण करते हुए उन्होंने देखा की डॉ शाइना वहां मौजूद नहीं थी|
“अभी!” डॉ निवासन ने उसे पुकारा|
“डॉ शाइना को ढून्ढ कर यहाँ ले आओ|”
अभी सर हिलाते हुए अप्रसांता के साथ यह सोचते हुए की ‘मैं ही क्यों?’ सीधे दरवाज़े की और चला गया| वह जनता था की वह महिला कहा मिलेगी! जैसी की उसे उम्मीद थी, वह अगले कमरे में बैठी हुई थी| वह ध्यान से अपने नोट्स का अध्यन कर रही थी|
“आप अब भी यही है?” उसने अनिच्छा से बिना झिझकते हुए कहा|
“मैं बस, अपने द्वारा तैयार किये गए नोट्स पढ़ रही थी| यह शायद हमारी सहायता…”
“डॉ निवासन आपको बुला रहे है|” अभी ने उन्हें टोकते हुए कहा|
शाइना ने ‘हाँ’ में सर हिलाया|
डॉ शाइना और अभी साथ चलने लगे| लैब में प्रवेश करने से ठीक पहले शाइना ने दृढ़ता के साथ कोमल स्वर में कहा, “अभी तुम्हे अघोरियों के बारे में बहुत कुछ पता है, फिर भी मैं तुम्हारी जानकारी में एक चीज़ और लाना चाहती हूँ की अघोरियों का सिद्धांत होता है की वह किसी प्राणी या चीज़ के प्रति धारणा नहीं रखते| उनका मानना है की जो धारणा करता है, वह साधना नहीं कर सकता और मोक्ष नहीं प्राप्त कर सकता| हम जो हमेशा दुसरो से नफरत करने की वजह तलाशते रहते है, चाहे वह धार्मिक विचारो, त्वचा के रंग, भाषा, लेग्गिंग विभिन्ता, राजनितिक दृष्टिकोण, लिंग या नेसल पर आधारित हो| हमे उनसे सीखना चाहिए| बात का सार यह ही की मेरा व्यवहार लोगो के साथ उनके व्यक्ति होने के आधार पर है, न की उनकी जाती के आधार पर; और मैं चाहूंगी की सामने वाला भी मुझसे वैसे ही व्यवहार करे| क्या तुम्हे बात समझ में आयी?” शाइना ने घूरते हुए कहा|
अभी समझ गया और उसने ‘हाँ’ करते हुए सर हिलाया| जैसे ही उन्होंने लैब में प्रवेश किया, डॉ बत्रा, डॉ निवासन से बात कर रहे थे, “सर हम क्या करेंगे, यदि फिरसे दवाइयों का असर उस पर नहीं हुआ?” डॉ बत्रा परेशां थे|
“हम देखेंगे|” डॉ निवासन ने जवाब दिया| डॉ बत्रा के शब्दों को अनसुना कर दिया गया था|
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